जलीकट्टू के समर्थन में शुक्रवार को अनशन करेंगे संगीतकार एआर रहमान

नई दिल्ली (19 जनवरी): जलीकट्टू के समर्थन में तमिलनाडु पर जमकर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। अब संगीतकार एआर रहमान ने ऐलान किया है कि वह शुक्रवार को जलीकट्टू के लिए अनशन करेंगे।

दक्षिण भारत में हर साल पोंगल पर होने वाला जलीकट्टू एकबार फिर से सुर्खियों में हैं। जलीकट्टू पर बैन को परंपरा और आस्था के साथ खिलवाड़ बताते हुए जलीकट्टू के समर्थन में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। पिछले 3 दिनों से चेन्नई, मदुरै, कोयंबटूर, दिल्ली समेत कई शहरों में लाखों लोग सड़कों पर उतर कर जलीकट्टू के समर्थन में उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं। हैरान करने वाली बात ये है कि जानवरों पर जुल्म के इस खेल के समर्थन में प्रदर्शनकारियों को अब नेताओ और अभिनेताओं का भी साथ मिलने लगा है।जलीकट्टू पर बैन को लेकर हालात कितने ज्यादा गंभीर है, उसका अंदाजा सिर्फ इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पूरे मसले को लेकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम गुरुवार को पीएम नरेंद्र मोदी से मिलकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ अध्यादेश लाने की मांग की। खबर है कि पीएम ने कहा है कि मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है लेकिन ये भी कहा कि केंद्र जलीकट्टू से बैन हटाने के मुद्दे पर राज्य सरकार के साथ है।चेन्नई के मरीना बीच पर पिछले 3 दिनों से लाखों की तादात में जलीकट्टू के समर्थन में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। ट्रेनों के ट्रैक को भी बाधित किया जा रहा है। रेलवे के पुल पर लोग चढ़ पर अपनी मांग मनवाने की कोशिश कर रहे हैं। जलीकट्टू के विरोध में रातभर मरीना बीच पर बैठकर लोगों ने प्रदर्शन किया। लोग जलीकट्टू पर बैन हटाने के साथ ही साथ जानवरों के अधिकार के लिए काम करने वाली संस्था पेटा पर भी बैन लगाने की मांग कर रहे हैं।पूरे दक्षिण भारत से एक सुर में जलीकट्टू के समर्थन में आवाज उठ रही है। तमिलानाडु के 31 कॉलेजों ने जलीकट्टू के रोक के विरोध में पढ़ाना बंद कर दिया है, लेकिन सवाल तो ये है कि जिस परंपरा को देश की सबसे बड़ी अदालत ने जानवरों पर जुल्म ढाने वाला बता कर बैन कर दिया था। उस परंपरा को आस्था की आड़ लेकर फिर से शुरू कराने की वकालत करना कितना सही है।