अफगानिस्तान में लगे पाकिस्तान विरोधी नारे, PAK से जंग के ऐलान की अपील

नई दिल्ली (8 अप्रैल): आखिरकार अफगानिस्तान के लोगों का पाकिस्तान पर गुस्सा फूट ही गया है। पूरे अफगानिस्तान में पाकिस्तान के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। जगह-जगह पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं, जनता पाक विरोधी नारे लगा रही है। पाकिस्तान के झंड़े जलाए जा रहे हैं और यह सब हो रहा है पाकिस्तान की नापाक हरकत के वजह से। पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान में लगातार की जा रही गोलीबारी के खिलाफ लोगों में आक्रोश फूट पड़ा है। आतंकवाद के पनाहगाह पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी कर रहे लोगों ने अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी से मांग की कि वह पाक के खिलाफ जंग का ऐलान करें। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से पाक-अफगान सीमा के पास भी पाक ने मिलिट्री एक्टिविटी बढ़ा दी है। सीमा पर रह रहे अफगान लोगों पर आतंकी होने का आरोप लगाकर उनके साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। नंगरहार और कुनार जैसे अफगान शहरों पर पाकिस्तान तालिबान के खात्मे के नाम पर बेगुनाहों पर मिसाइलें बरसा रहा है।


इस वीडियो जो आप देख रहे हैं यह हेलमंद प्रांत के लश्करगाह का है।

21 फरवरी के इस वीडियो में पाक के खिलाफ जमकर प्रदर्शन हुए।

वीडियो में पाक पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

वीडियो में देखा जा सकता है कि लोग पाकिस्तान का झंड़ा जला रहे हैं।

प्रदर्शनकारी पाक के खिलाफ युद्ध घोषित करने की अपील भी कर रहे हैं।

युद्ध घोषित किया गया तो अफगान तालिबान पाक सेना के खिलाफ लडेगा।

दरअसल ये लोग पाकिस्तान से हो रही लगातार गोलीबारी का विरोध कर रहे हैं।


अफगान युवाओं को गुमराह कर रहा ISI...

पिछले कुछ समय से पाकिस्तान ने अफगान सीमा पर सैन्य ताकत बढ़ा दी है।

पाक सेना के साथ-साथ ISI पर उस क्षेत्र में युवाओं को भड़काने में लगी है।

ISI मुस्लिम धर्मगुरूओं की मदद से उन्हें धर्म के नाम लड़ने के लिए उकसा रही है।

पाक सेना और ISI का मकसद है कि तालिबान में आपस में फूट पड़ जाए।

अफगान तालिबान और पाक तालिबान एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाएं।

साथ ही पाकिस्तान का मकसद है अफगानिस्तान में ज्यादा से ज्यादा हमले किए जाएं।

पाकिस्तान का मकसद रहा है अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास को टारगेट करने का।

2008, 2009, 2014, 2016 में भारतीय दूतावास पर बड़े आतंकी हमले हो चुके हैं।


भारत-अफगानिस्तान की नजदीकियों से जलता है पाकिस्तान- अफगानिस्तान की लीडरशिप का नवाज शरीफ की कठपुतली सरकार से मोहभंग हुआ है। पाक सेना के शासक और खुफिया एजेंसियां सालों-साल जिस आतंकी संगठन ‘हिज़्ब ए इस्लामी’ और उसके नेता गुलबुद्दीन हिकमतयार का इस्तेमाल करते रहे, अब वह उनके चंगुल से बाहर है। अफगानिस्तान सरकार से गुलबुद्दीन हिकमतयार का शांति समझौता, पाकिस्तान के लिए ग्वादर, क्वेटा से लेकर खैबर पख्तूनख्वा की गतिविधियों में मुश्किलें पैदा करेगा। हिज़्ब ए इस्लामी और तालिबान को यदि अफगान राष्ट्रपति गनी राजनीति की पटरी पर ले आते हैं, तो पाक-अफगान सीमा की 2430 किलोमीटर ‘डुरंड लाइन’ की तस्वीर ही बदल जाएगी।


अफगान राष्ट्रपति पाकिस्तान को सुना चुके हैं खरी खरी- अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी भारत और पीएम मोदी के मुरीद हैं। साथ ही आतंकवादियों को पनाहगाह मुहैया कराने के लिए पाकिस्तान पर बसरते रहे हैं। पिछले साल राष्ट्रपति गनी ने कहा था कि काबुल भारत के साथ अपनी दोस्ती को लेकर गौरवान्वित है, क्योंकि नई दिल्ली अफगानिस्तान के लोकतांत्रिक आकांक्षाओं में भागी है। इसके विपरीत गनी ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देता है और उनको प्रशिक्षित करता है, जिससे पाकिस्तान के साथ संबंध बनाना उनके देश के लिए बड़ी चुनौती है।