27,000 करोड़ रुपये की एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल डील पर मंडराए विवादों के बादल

नई दिल्ली (17 मई): भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने के लिए कंधे पर रखकर चलाने वाली ऐंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलें खरीदने की एक बड़ी डील विवादों में घिर गई है। कॉम्पिटीटर्स ने आरोप लगाते हुए कहा कि इस डील के लिए जरूरी तकनीकी शर्तों को पूरा नहीं करने के बावजूद एक रूसी सिस्टम को इसके लिए योग्य माना गया है। 

यह भी आरोप है कि ट्रायल्स के दौरान यह सिस्टम अपनी क्षमता साबित करने में विफल रहा। 27,000 करोड़ रुपये की लागत से वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस (VSHORAD) मिसाइलों को खरीदने की इस योजना को 2010 में यूपीए सरकार के शासनकाल में शुरू किया गया था। इसके बाद से ही इस डील में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं, जिसके लिए फ्रांसीसी, स्वीडिश और रूसी कंपनियां दावेदार थीं।

गौरतलब है कि वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस मिसाइलों को खरीदने की प्रक्रिया साल 1999 में शुरू हुई थी। जब पहली बार रूसी आईजीएलए एम सिस्टम को बदलने के लिए बात सामने आई। बता दें कि आईजीएलए एम सिस्टम को भारतीय सेना 1980 से इस्तेमाल कर रही थी। 

वहीं, हवा में शॉर्ट रेंज टार्गेट को गिराने की क्षमता रखने के बावजूद भी इस मिसाइल की डील की प्रक्रिया साल 2010 तक शुरू नहीं हो पाई। 2010 में इसके लिए ग्लोबल टेंडर जारी किए गए।