कश्मीर पंडितों के दर्द पर अनुपम खेर ने जारी किया वीडियो, कहा-हमने हथियार नहीं उठाए

नई दिल्ली(19 जनवरी): कश्मीरी पंडितों के घाटी से विस्थापन की 27वीं बरसी पर ऐक्टर अनुपम खेर ने उन्हें एक कविता समर्पित की है। उन्होंने ट्वीट करके लिखा है, '27 साल हो गए, हम कश्मीरी पंडित अपने ही देश में अब भी शरणार्थी हैं। यह कविता उनके उस खामोश विरोध की प्रतीक है। इसे शेयर करें।'

- इस कविता को मशहूर कश्मीरी कवि डॉ शशि शेखर तोशखानी ने लिखा है। वीडियो में खेर कहते हैं, 'फैलेगा-फैलेगा हमारा मौन समुद्र में नमक की तरह। नसों के दौड़ते रक्त में घुलता हुआ पहुंचेगा दिलों की धड़कनों के बहुत समीप। और बोरी से रिसते आटे सा देगा हमारा पता (पूरी कविता नीचे सुनें)।' उन्होंने यह भी कहा कि ये आवाजें अब और खामोश नहीं रहेंगी।

- न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में खेर ने कहा कि 27 साल बीत जाने के बावजूद किसी ने हथियार नहीं उठाए क्योंकि वे शांति और अपने देश की महानता में विश्वास करते हैं। उन्होंने कहा,'कोई कश्मीरी पंडित उस दिन को भुला नहीं सकता। मस्जिदों से ऐलान किया जा रहा था, कश्मीरी पंडितों अपना घर छोड़कर चले जाओ। वह रात हमारे कश्मीरी पंडित दोस्त और रिश्तेदार कभी नहीं भूल सकते।' खेर ने आगे कहा, 'आज 27 साल हो गए। घर से निकाले जाने के उस दिन को याद रखे जाने की जरूरत है। हमारी कोशिश उन लोगों तक अपनी आवाज पहुंचाना है, जो इस बारे में सुनना ही नहीं चाहते।'

- दरअसल, अनुपम खेर 19 जनवरी 1990 के उस वाकये के बारे में याद कर रहे थे, जब 60 हजार से ज्यादा कश्मीरी पंडित परिवार जम्मू-कश्मीर छोड़कर चले गए। घाटी में पाक समर्थित आतंकवाद के बढ़ते प्रभाव की वजह से उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। 2008 में जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से बनाई गई रिपोर्ट के मुताबिक, 1989 में आतंकवाद के उदय के साथ ही 24 हजार से ज्यादा कश्मीरी पंडितों का परिवार घाटी छोड़कर चला गया था।

- इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि वहां 1989 से 2004 के बीच 209 पंडितों की हत्या कर दी गई। हालांकि, कश्मीरी पंडितों से जुड़े बहुत सारे संगठनों का दावा है कि मारे गए लोगों की संख्या हजारों में है। कश्मीरी पंडितों के हित में काम करने वाले संगठनों का कहना है कि इन मामलों में किसी को सजा नहीं हुई।