पाकिस्तान में जर्जर हुआ 900 साल पुराना हिन्दुओं का पौराणिक मंदिर 'कटासराज'

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (23 फरवरी): पाकिस्तान में हिन्दुओं के कई प्राचीन मंदिर स्थित हैं। पौराणिक व ऐतिहासिक महत्व के इन मंदिरों में से कई 1000 साल पुराने हैं। लेकिन अफसोस की बात है की आज ये सभी मंदिर जर्जर हालत में हैं और इसका कारण है हिंदुओं के धर्मस्थलों के प्रति पाकिस्तान सरकार की उपेक्षा। पाकिस्तान में आजादी के समय हिंदुओं के 1,253 धार्मिक स्थल थे, लेकिन आज सिर्फ 703 बचे हैं जिसमें से 95 फीसदी जर्जर हैं। आज हम बात कर रहे हैं पाकिस्तान में हिंदुओं के सबसे प्राचीन मंदिर 'कटासराज' की। कटासराज पाकिस्तान में 900 साल पुराना शिव मंदिर है। मंदिर पाकिस्तान की राजधानी लाहौर से करीब 270 किमी की दूरी पर चकवाल जिले में स्थित है। मंदिर के पास ही पवित्र सरोवर है जिसका संबंध पुष्कर तीर्थ से माना गया है। लेकिन आज यह मंदिर अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। सरंक्षण और विकास के नाम पर पाकिस्तान सरकार ने हिंदू आबादी के साथ धोखा किया है। पाक सरकार मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए करोड़ों रुपए खर्च करने का दावा करती है लेकिन मंदिर की हालत देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार की बातों में कितना दम है। इमारतों में जगह-जगह पर दरारें दिखाई देती हैं। जरा सी बरसात होने पर दरारों में पानी का रिसाव होने लगता है। पाकिस्तान के मशहूर ऑर्किलोजिस्ट खुर्शीद हसन शेख और डायरेक्टोरेट जनरल मॉनिटरिंग और इवैल्युएशन ने खुद अपनी रिपोर्ट में कटासराज में सरंक्षण कार्य को बहुत ही घटिया करार दिया है। पाकिस्तान में कई अहम ओहदों पर काम कर चुके खुर्शीद हसन शेख बताते हैं कि कटासराज कॉम्प्लेक्स में मौजूद मंदिरों के गुंबदों, छतों, दीवारों और सीढ़ियों की मरम्मत ठीक ढंग से नहीं की गई, जिससे अनेक जगहों पर दरारें उभर आई हैं। इसी तरह बिजली का काम भी बीच में अधूरा छोड़ दिया गया है। सारे कॉम्पलेक्स में सीवरेज मैनहोल के ढक्कन या तो टूटे हुए हैं या फिर गायब हो चुके हैं। साल 2006-07 से 2015-16 के बीच विकास कार्यों पर 11 करोड़ से ज्यादा की रकम खर्च की गई, मगर इसके बावजूद अनेक खामियां रह गई।

ऐतिहासिक कटासराज मंदिर

पाकिस्तान में सबसे बड़ा शिव मंदिर कटासराज है, जो लाहौर से 270 किमी दूर चकवाल जिले में स्थित है। मान्यता है कि वनवास के दौरान पाण्डव करीब 4 चार साल तक यहां रहे थे और इन्होंने कटासराज शिवलिंग की पूजा की थी। वर्तमान स्थिती में दिखता मंदिर 900 साल पुराना है इसके पास एक सरोवर है। इस सरोवर के विषय में मान्यता है कि सती के अत्मदाह करने के बाद महादेव जब सती का शव लेकर भ्रमण कर रहे थे तब उनकी आंखों से दो बूंद आंसू गिर थे। उनके आंसुओं की दो बूंदे धरती पर गिरीं, जिनसे यह सरोवर बना। इनमें से एक कुंड भारत के पुष्कर में ब्रह्म सरोवर है तो दूसरा कटासराज मंदिर में। इस सरोवर का पानी दो रंग का है। जहां सरोवर कम गहरा है वहां का पानी हरा, जबकि गहराई वाली जगह का पानी नीला है।

यहां अज्ञातवास में रहे थे पांडव- ऐसी मान्यता है कि पाण्डव जब राजपाट जुए में हारकर वन-वन भटक रहे थे तब वह इस स्थान पहुंचे। यहीं वह कुण्ड है जहां पांडव प्यास लगने पर पानी की खोज में पहुंचे थे। इस कुण्ड पर यक्ष का अधिकार था। पानी पीने के लिए पूछे गए उसके प्रश्नों का जवाब न दे पाने के कारण चारों भाइयों के मूर्क्षित होने के बाद अंत में युधिष्ठिर उन्हें खोजते हुए कुण्ड के किनारे पहुंचे। उन्होंने चारों भाइयों को मूर्छित पड़े देखा तो ऐसा करने वाले को ललकारा। यक्ष के सामने आने पर उन्होंने यक्ष के प्रश्नों का जवाब दिया, तब चारों भाइयों की मूर्क्षा समाप्त हुई।

कटास राज मंदिर की जर्जर हालत...

- हिंदुओं के पवित्र तीर्थ कटास राज मंदिर इसका सबसे बड़ा उद्हारण है।

- पाक सरकार ने रख-रखाव के नाम पर 10 करोड़ रुपए खर्च करने की बात की।

- बावजूद यहां की इमारतों में जगह-जगह पर दरारें दिखाई देती है।

- खुद पाकिस्तान के मशहूर ऑर्किलोजिस्ट खुर्शीद हसन शेख का कहना है।

- कटास राज में कराए गए विकास कार्य बहुत ही घटिया स्तर के हुए हैं।

हिंदुओं के मंदिर खत्म करने की पाकिस्तान की चाल

- मंदिरों को खत्म करने के लिए वहां की सरकार एक खास रणनीति पर काम करती है।

- ऐतिहासिक प्राचीन मंदिरों को नुकसान नहीं पहुंचा जाता क्योंकि वह अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बन सकते हैं।

- ऐसे में उन्हें जर्जर रहने के लिए छोड़ दिया जाता है, अपने आप दीवारें कमजोर हो कर ढहने लगती हैं।

- दूसरी और हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों ने उन्हें पाकिस्तान से पलायन पर मजबूर कर दिया है।

- यूरोपियन पार्लियामेंट इंटर ग्रुप ऑन फ्रीडम आफ रिलीजन और पाक मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट इसका खुलासा करती हैं।

- ऐसे में जब मंदिर में पूजा करने वाले नहीं रहते तो वह उन्हें पाकिस्तान सरकार अपने अधिकार में ले लेती हैं।

- राम पीर मंदिर कराची के सोल्जर बाजार में था, जिसे 2007 में बिल्डर्स द्वारा ढहा दिया गया था।

हिंदूओं के धार्मिक स्थलों को चुन-चुन कर किया जा रहा है खत्म...

- पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के मुताबिक ऐसे 1400 से अधिक पवित्र स्थान हैं जहां उनकी पहुंच नहीं है।

- हिंदुओं के धार्मिक स्थलों को समाप्त कर वहां दुकानें, होटल, गोदाम, पशु बाड़ों में बदला जा रहा है।

- माइनॉरिटी राइट ग्रुप इंटरनेशनल के मुताबिक पाकिस्तान में तकरीबन 120 हिन्दू मंदिरों को गिराया गए।

- आजादी के वक्त पाकिस्तान में कुल 428 बड़े मंदिर थे, जिनमें से अब सिर्फ 26 ही बचे हैं।

हिंगलाज देवी के मंदिर भी हुआ जर्जर...

- हिंगलाज भवानी देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक है।

- बलूचिस्तान में ल्यारी जिला के हिंगोल नदी के किनारे स्थित है।

- बंटवारे से पहले यहां लाखों की तादात में श्रद्धालु आया करते थे।

- लेकिन आज हालत यह है कि यहां पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं है।

- मंदिर विशाल पहाड़ के नीचे एक प्राचीन गुफा में स्थित है।

- मंदिर आज भी सरकारी सहयोग का मोहताज है।

- पाकिस्तान की किसी भी सरकार ने इसके लिए एक रूपया तक खर्च नहीं किया।

- उल्टा हिंगोल नदी पर विशाल डैम बनाया जा रहा है जो मंदिर के लिए खतरा है।

- कई हिंदू संगठन डैम का विरोध कर रहे हैं, डैम बनते ही मंदिर पानी में समा जाएगा।