पाकिस्तान में जर्जर 2000 साल पुराना हिन्दुओं का शक्तिपीठ 'हिंगलाज'

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (30 मार्च): पाकिस्तान में हिन्दुओं के कई प्राचीन शक्तिपीठ और मंदिर स्थित हैं। पौराणिक व ऐतिहासिक महत्व के इन मंदिरों में से कई 1000 साल पुराने हैं। लेकिन अफसोस की बात है की आज ये सभी मंदिर जर्जर हालत में हैं और इसका कारण है हिंदुओं के धर्मस्थलों के प्रति पाकिस्तान सरकार की उपेक्षा। ऐसा ही एक मंदिर है पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हिंगलाज शक्तिपीठ। 2000 साल पुराना देवी का शक्तिपीठ पाकिस्तान में सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार ये शक्तिपीठ देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक है। शास्त्रों में इस शक्तिपीठ को आग्नेय तीर्थ कहा गया है। यहां सती माता का सिर गिरा था। बलोच मुस्लिम इस शक्तिपीठ को  'नानी का हज' के नाम से पुकारते हैं। लेकिन आज हिन्दुओं के इस तीर्थस्थल की हालत जर्जर है। ना कोई रख-रखाव, ना कोई सड़क, ना बिजली, ना रहने और खाने-पीने की सुविधा। उल्टा पाक सरकार इस शक्तिपीठ को खत्म करने में लगी है वो मंदिर से सटी हिंगोल नदी पर विशाल डैम बना रही है जिससे मंदिर के अस्तित्व को ही खतरा है।


शक्तिपीठ तक जाने के लिए सड़क तक नहीं...

- हिंगलाज भवानी देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक है।

कराची से 120 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में।

- मकराना में ल्यारी जिला के हिंगोल नदी के किनारे  स्थित है।

- बंटवारे से पहले यहां लाखों की तादात में श्रद्धालु आया करते थे।

- लेकिन आज हालत यह है कि यहां पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं है।

- मंदिर विशाल पहाड़ के नीचे एक प्राचीन गुफा में स्थित है।

- मंदिर आज भी सरकारी सहयोग का मोहताज है।

मंदिर तक दो रास्तों से पहुंचा जा सकता है, एक पहाड़ी दूसरा रेगिस्तान।

पाकिस्तान सरकार ने सड़क तो बनाई ये लेकिन मंदिर के लिए नहीं।

- पाकिस्तान की किसी भी सरकार ने इसके लिए एक रूपया तक खर्च नहीं किया।

- उल्टा हिंगोल नदी पर विशाल डैम बनाया जा रहा है जो मंदिर के लिए खतरा है।

- कई हिंदू संगठन डैम का विरोध कर रहे हैं, डैम बनते ही मंदिर पानी में समा जाएगा।


हिंगलाज शक्तिपीठ की मान्यता- हिंगलाज शक्तिपीठ देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान राज्य की राजधानी कराची से 120 किलोमीटर दूर हिंगोल नदी के तट पर स्थित है। इस मंदिर के पीछे मान्यता है कि अपने पिता दक्ष द्वारा अपमानित होकर देवी सती ने अपना शरीर त्याग दिया था तब भगवान शिव ने क्रोध में आकर संसार से वैराग्य ले लिया था। वह सती के शव को अपने कंधे पर उठाए ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाने। शिव के वैराग्य धारण कर लेने से सृष्टि की संचालन बाधित हो रहा था इसलिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शव के टुकड़े कर दिए थे। जहां-जहां सती के शव के अंग गिरे थे वहां-वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। मान्यता है कि पाकिस्तान के जिस क्षेत्र में आज हिंगलाज माता का मंदिर स्थापित है, वहां देवी सती का सिर आकर गिरा था।


बलोच मुसलमान कहते हैं 'नानी का हज'- हिन्दूओं के साथ-साथ बलोच मुस्लिम इस शक्तिपीठ के प्रति गहरी आस्था रखते हैं। हिन्दुओं के लिए यह स्थान एक शक्तिपीठ है और मुसलमानों के लिए यह नानी पीर का स्थान है। इस मंदिर पर आने वाले तीर्थयात्रियों का कहना है कि हिन्दू चाहे चारों धाम की यात्रा क्यों ना कर ले, काशी के पानी में स्नान क्यों ना कर ले, अयोध्या के मंदिर में पूजा-पाठ क्यों ना कर लें, लेकिन अगर वह हिंगलाज देवी के दर्शन नहीं करता तो यह सब व्यर्थ हो जाता है। 


पाकिस्तान में जर्जर पड़े हैं हिन्दुओं के ज्यादातर पौराणिक मंदिर-  पाकिस्तान में आजादी के समय हिंदुओं के 1,253 धार्मिक स्थल थे, लेकिन आज सिर्फ 703 बचे हैं जिसमें से 95 फीसदी जर्जर हैं। हिंगलाज, कटासराज समेत हिंदुओं के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर आज अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। सरंक्षण और विकास के नाम पर पाकिस्तान सरकार ने हिंदू आबादी के साथ धोखा किया है। पाक सरकार मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए करोड़ों रुपए खर्च करने का दावा करती है लेकिन मंदिर की हालत देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार की बातों में कितना दम है। पाकिस्तान के मशहूर ऑर्किलोजिस्ट खुर्शीद हसन शेख और डायरेक्टोरेट जनरल मॉनिटरिंग और इवैल्युएशन ने खुद अपनी रिपोर्ट में जहां कटासराज मंदिर में सरंक्षण कार्य को बहुत ही घटिया करार दिया है। तो हिंगलाज में तो पाक सरकार ने कोई कार्य ही नहीं कराया है। उल्टा शक्तिपीठ से सटी हिंगोल नदी पर विशाल डैम बनाया जा रहा है जो मंदिर के लिए खतरा है।


मंदिरों को खत्म करने की पाकिस्तान की चाल...

- मंदिरों को खत्म करने के लिए वहां की सरकार एक खास रणनीति पर काम करती है।

- ऐतिहासिक प्राचीन मंदिरों को नुकसान नहीं पहुंचा जाता क्योंकि वह अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बन सकते हैं।

- ऐसे में उन्हें जर्जर रहने के लिए छोड़ दिया जाता है, अपने आप दीवारें कमजोर हो कर ढहने लगती हैं।

- दूसरी और हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों ने उन्हें पाकिस्तान से पलायन पर मजबूर कर दिया है।

- यूरोपियन पार्लियामेंट इंटर ग्रुप ऑन फ्रीडम आफ रिलीजन और पाक मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट इसका खुलासा करती हैं।

- ऐसे में जब मंदिर में पूजा करने वाले नहीं रहते तो वह उन्हें पाकिस्तान सरकार अपने अधिकार में ले लेती हैं।

- राम पीर मंदिर कराची के सोल्जर बाजार में था, जिसे 2007 में बिल्डर्स द्वारा ढहा दिया गया था।


हिंदूओं के धार्मिक स्थलों को चुन-चुन कर किया जा रहा है खत्म...

- पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के मुताबिक ऐसे 1400 से अधिक पवित्र स्थान हैं जहां उनकी पहुंच नहीं है।

- हिंदुओं के धार्मिक स्थलों को समाप्त कर वहां दुकानें, होटल, गोदाम, पशु बाड़ों में बदला जा रहा है।

- माइनॉरिटी राइट ग्रुप इंटरनेशनल के मुताबिक पाकिस्तान में तकरीबन 120 हिन्दू मंदिरों को गिराया गए।

- आजादी के वक्त पाकिस्तान में कुल 428 बड़े मंदिर थे, जिनमें से अब सिर्फ 26 ही बचे हैं।