सऊदी अरब से मलेशियाई पीएम के निजी खाते में 4538 करोड़ रुपए पहुंचने की पहेली?

नई दिल्ली (16 अप्रैल) :  मलेशिया के प्रधानमंत्री नज़ीब रज़ाक के निजी खाते में एक सऊदी स्रोत की ओर से पिछले साल 68.1 करोड़ डॉलर (4538.82 करोड़ रुपए) जमा किए जाने पर सऊदी विदेश मंत्री की ओर से क्लीन चिट दी गई है।

सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने गुरुवार को कहा कि एक अज्ञात सऊदी स्रोत ने 'वास्तविक चंदे'  के नाम पर ये बड़ी रकम जमा कराई थी। इसके साथ कोई शर्तें नहीं थीं। सऊदी अरब के विदेश मंत्री का बयान वैसा ही है जैसे कि मलेशिया के शीर्ष नेता दे रहे हैं। यानि की इस रकम को जमा कराने में कोई घोटाला नहीं था।  

द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे लोग जिनके खाते में कभी इतनी मोटी रकम बिना शर्त नहीं आई, वो इस सफाई को लेकर आशंकित हो सकते हैं। वास्तव में नज़ीब अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट समेत कई अंतरराष्ट्रीय जांच के केंद्र में रहे हैं। लेकिन वे हमेशा किसी गलत आचरण से जुड़े होने से इनकार करते रहे हैं।

पिछले साल जुलाई में ऐसी रिपोर्ट आई थीं जिनमें नज़ीब पर अपने खातों में मोटी रकम जमा करने के आरोप लगे थे। उनके विरोधियों ने इस रिपोर्ट के आने के बाद नज़ीब से इस्तीफा देने की भी मांग की थी। ये भी कहा गया था कि नज़ीब के खाते में जमा कुछ रकम आपराधिक तरीके से मलेशिया डवलपमेंट बोर्ड से आई थी। अभी स्विस जांचकर्ताओं ने भी कहा कि कम से कम 4 अरब डॉलर का मलेशिया की सरकारी कंपनियों से हेरफेर हुआ।

ऐसी सारे आरोपों पर मलेशिया सरकार ने सख्ती से जवाब दिया था। जांचकर्ताओं पर जहां अंकुश लगाए गए वहीं एक न्यूज़ संगठन को निलंबित कर दिया गया। एक उपप्रधानमंत्री को इसलिए बर्खास्त कर दिया गया क्योंकि उन्होंने सवाल उठाए थे।

इस साल जनवरी में नज़ीब की ओर से नियुक्त किए गए अटॉर्नी जनरल मोहम्मद अपांदी अली ने नज़ीब को गलत आचरण के सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था। अपांदी अली ने एक बयान में कहा था कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जो बताता हो कि चंदा आपराधिक ढंग से दिया गया था और भ्रष्टाचार से जुड़ा था।

अब सऊदी अरब के विदेश मंत्री आदेल अल जुबेर ने भी कहा है कि ये वास्तविक चंदा था और इसके बदले में कुछ नहीं चाहा गया था। हम अवगत है कि मलेशिया के अटॉर्नी जनरल ने समुचित जांच करने के बाद इसमें कुछ भी गलत नहीं पाया था। जहां तक हमारा सवाल है तो हमारे लिए ये मामला बंद हो चुका है।

जनवरी में अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि ये पैसा सऊदी शाही परिवार से निजी चंदा था और इसमें से नज़ीब ने 62 करोड़ डॉलर लौटा दिए थे। क्योंकि उसका इस्तेमाल नहीं हुआ था।

अब यहां ये सफाई नहीं दी गई थी कि सऊदी शाही परिवार ने क्यों मलेशिया के प्रधानमंत्री नज़ीब के निजी खाते में 68.1 करोड़ डॉलर भेजे थे। और क्यों नज़ीब ने जब रकम लौटाई तो 6.1 करोड़ डॉलर क्यों अपने पास रख लिए।

गुरुवार को सऊदी अरब के विदेश मंत्री का बयान आने से पहले तक किसी भी सऊदी अधिकारी ने ये नहीं कहा था कि पूरी रकम सऊदी अरब के एक स्रोत से चंदे के तौर पर थी। सऊदी विदेश मंत्री ने ये चंदा देने वाले की पहचान नहीं खोली। ना ही ये बताया कि ये चंदा किस मकसद से दिया था। सऊदी विदेश मंत्री ने इस बात की पुष्टि भी नहीं की कि अधिकतर रकम लौटा दी गई थी।

हालांकि सऊदी विदेश मंत्री जुबेर ने फरवरी में एक इंटरव्यू में कुछ और बातें कही थीं। तब कहा गया था कि मैं समझता हूं कि ये एक सऊदी नागरिक की ओर से निजी तौर पर मलेशिया में किया गया निवेश

नज़ीब ने जहां सऊदी अरब के विदेश मंत्री के ताजा बयान का स्वागत किया है वहीं मलेशिया के विरोधी दलों ने लीपापोती वाला बताया है।

बता दें कि अगस्त में कुआलालंपुर में हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने एकत्र होकर पुलिस आदेशों का उल्लंघन किया था। प्रधानमंत्री नज़ीब के खिलाफ गुस्से का इज़हार करते हुए कहा गया था कि क्या इतने मोटे कैश ट्रांसफर पर लोगों को बेवकूफ़ समझते हैं।