WATCH : 'डियर गर्ल फ्रॉम पाकिस्तान...' भावुक कर देगा इसे पढ़ना

खुशदीप सहगल, नई दिल्ली (12 मार्च) भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर बहुत कुछ कहा जाता है। राजनयिक रिश्तों से अलग दोनों देशों की युवा पीढ़ी कैसा सोचती है, इसकी बहुत खूबसूरत बानगी दिल्ली की लड़की शिवानी गुप्ता ने पेश की है। शिवानी ने पाकिस्तान में एक अनाम लड़की को संबोधित करते हुए कविता के माध्यम से अपने जज़्बातों को उकेरा है। इस कविता का यू-ट्यूब पर विडियो भी डाला गया है, जिसे भारत के साथ पाकिस्तान में भी खूब पसंद किया जा रहा है।

पाकिस्तान के अग्रणी अखबार 'डान' में लाहौर की पत्रकार लुआवत ज़ाहिद ने शिवानी की कविता को लेकर शनिवार को रिपोर्ट भी प्रकाशित की। शिवानी पाकिस्तान की अनजान हमउम्र लड़की से जो भी कहती हैं वो उन बातों से पूरी तरह अलग है जो दोनों देशों में एक-दूसरे के बारे में नकारात्मक तस्वीर पेश करते हुए की जाती हैं।  

शिवानी ने अपनी कविता का अंत इन शब्दों के साथ किया-

डियर गर्ल फ्रॉम पाकिस्तान,

मैं जानती हूं कि मुझे ऐसा करने में 69 साल लगे,

लेकिन मैं जानती हूं कि अब भी बहुत देर नहीं हुई,

भूल जाओ कि खबरों में क्या रहा,

मुझे बताओ, तुम्हारा दिन कैसा रहा?  

 

कविता की शुरुआत में शिवानी कहती हैं-

देखो, यहां मैं लड़ाई शुरू करने के लिए नहीं हूं,,

मैं बस तुम्हे 'Hi'  बोलने के लिए आई हूं,..

कैसी हो तुम?

अब शिवानी के इन शब्दों पर गौर कीजिए-

"हमें जो चीज़ एक दूसरे से अलग करती है, वो है सरहद, जिसे हमने नहीं बनाया है..."

कविता में अनाम पाकिस्तानी लड़की से शिवानी कहती है कि एक दूसरे से बातचीत और मिलने-जुलने के खोए हुए अवसरों के लिए खेद जताती हूं।

शिवानी कविता में भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली बसों (अधिकतर खाली) की बात करती हैं। पाकिस्तानी लड़की से ये भी कहती हैं कि फिल्में और गाने वो चीज़ जो हैं एक जैसे ही हम दोनों के दिलों पर राज करते हैं।

बता दें कि बॉलिवुड की फिल्मों और एक्टर्स का पाकिस्तान में भी वैसे ही क्रेज़ है जैसे कि भारत में है।

लुआवत ज़ाहिद ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि सोशल मीडिया के माध्यम से वो शिवानी से संपर्क करने में कामयाब रही हैं। लुआवत के मुताबिक वो भी शिवानी जैसी सोच रखती हैं और शिवानी से अंतर्संवाद करने लगी हैं।   

 शिवानी ने कविताएं लिखना 13 साल की उम्र में शुरू कर दिया था। उन्होंने 'डियर गर्ल फ्रॉम पाकिस्तान' दो साल पहले तब लिखी थी जब वो स्कॉटलैंड में रह रही थीं। वहां उन्हें अलग अलग देशों के बच्चों के साथ रहने का मौका मिला था।

वहां शिवानी ने पाया कि वो सब कुछ तो एक जैसा ही है जिस पर हम हंसते हैं, रोते हैं। इन इंसानी जज़्बातों के सामने भारत और पाकिस्तान के बीच के मतभेद कितने गौण हो जाते हैं।ये विचार आने के बाद शिवानी ने कविता की शुरुआती पंक्तियां फोन पर ही लिखना शुरू कर दिया। उनके लिए कागज़-पैन का इंतजार करना भी मुश्किल हो रहा था।

शिवानी के मुताबिक एक कदम पीछे खींच मैं सोचने को मजबूर हुईं कि जिस ज़मीन को मैंने कभी देखा नहीं, उसके बारे में नकारात्मकता महसूस करने की वजह क्या है। फिर पाया कि ऐसी सोच रखने का कोई अर्थ नहीं है। सिर्फ अतीत को कुरेदते रहना हमें कहीं नहीं ले जाएगा। शिवानी ने कहा कि उस वक्त के बारे में बोलना उचित नहीं, जिसका वो हिस्सा ही नहीं रहीं।

शिवानी का कहना है कि किसी व्यक्ति विशेष का सिर्फ उसकी भौगोलिक जगह, धर्म और ऐसी ही किसी और बात से आकलन करना, उनके हिसाब से जायज़ नहीं।

शिवानी कहती हैं कि इस छोटी सी कविता से ही उन्हें देश के साथ पाकिस्तान के लोगों से भी बहुत तारीफ मिली है। शिवानी साथ ही स्वीकार करती हैं कि उनका मकसद ये था कि पाकिस्तान के एक व्यक्ति तक भी ये कविता सही मायने के साथ पहुंच जाए तो वो बहुत खुश होंगी।  

देखें विडियो- (विडियो आभार- Delhi Poetry Slam)

[embed]https://www.youtube.com/watch?v=gaeR7pA5eb4[/embed]