अमृतसर हादसा: वॉट्सऐप पर देखा बेटे का कटा सिर, बेबस पिता को नहीं मिले शव के टुकड़े

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली ( 20 अक्टूबर ): अमृतसर में जोड़ा फाटक की रामलीला में रावण का किरदार निभाने वाले दलबीर सिंह भी ट्रेन हादसे का शिकार हो गए। शुक्रवार को रावण की भूमिका निभाने के बाद दलबीर रेल की पटरियों पर खड़े होकर पुतले को जलते हुए देख रहे थे तभी 60 अन्य लोगों के साथ ट्रेन की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई।  

मौत बनकर दौड़ी ट्रेन कई परिवारों को हमेशा के लिए दुखों के समंदर में डुबो गई। हंसी-खुशी के बीच रावण दहन देखने गए 60 से ज्यादा लोगों के परिजनों के आंसू थम नहीं रहे। हादसे के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि उनके अपने अब इस दुनिया में नहीं हैं। शनिवार को अमृतसर के शिव पुरी में एक साथ कई चिताएं जलती देख लोगों का कलेजा मुंह को आ गया।  

पीड़ित परिजनों की हृदय विदारक आपबीती सुनकर आपके भी आंसू निकल पड़ेंगे। जरा सोचिए उस पिता पर क्या गुजरी होगी, जिसने एक वॉट्सऐप मेसेज में अपने ही बेटे का कटा सिर देखा हो। जिस दिल के टुकड़े को गोदी में खिलाकर बड़ा किया था, उसी के शव के टुकड़े रेलवे ट्रैक पर बिखर गए तो उस अंतहीन दर्द का अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं। हादसे के बाद दर्दभरी दास्तानों में से ऐसी ही आपबीती एक बेबस पिता की है। विजय कुमार लाशों के ढेर में अपने बेटे के शरीर के टुकड़ों को तलाशते रहे लेकिन नाकामी ने उनके दर्द को और बढ़ा दिया है।

विजय कुमार उस मंजर को याद कर सिहर उठते हैं जब उन्होंने अपने 18 साल के बेटे के कटे हुए सिर की फोटो अपने वॉट्सऐप पर शनिवार तड़के तीन बजे देखी। विजय के दो बेटों में से एक आशीष भी घटनास्थल पर था। उसकी जान बच गई लेकिन दूसरा बेटा मनीष उतना खुशकिस्मत नहीं निकला। विजय को जब इस हादसे का पता चला तो वह अपने बेटे की तलाश में एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते रहे लेकिन कुछ पता नहीं चला। फिर अचानक उनके फोन के वॉट्सऐप पर एक फोटो आई जिसमें उनके बेटे का कटा हुआ सिर था। इस तलाश में उन्हें एक हाथ और एक पैर मिला लेकिन वह उनके बेटे का नहीं था।  

शोक में डूबे विजय रुंधे हुए गले से बताते हैं, 'मनीष नीली जींस पहने हुए था, यह पैर उसका नहीं हो सकता। मेरी तो दुनिया ही उजड़ गई।' इस हादसे के समय वहां मौजूद रही सपना को सिर में चोट आई है। उन्होंने बताया कि वह रावण दहन का घटनाक्रम वॉट्सएप वीडियो कॉल के जरिए अपने पति को दिखा रही थीं। जब पुतले में आग लगी तो लोग पीछे हटने लगे और पटरियों के करीब आ गए। जब ट्रेन करीब पहुंच रही थी तो लोग पटरी खाली करने लगे और दूसरी पटरी पर आ गये। इतने में एक और ट्रेन तेज गति से वहां आ गई और फिर भगदड़ मच गई।  

सपना ने इस हादसे में अपनी रिश्ते की बहन और एक साल की भांजी को खो दिया। वह बताती हैं कि अफरातफरी में लोग इधर-उधर भागने लगे और बच्ची पत्थरों पर जा गिरी और उसकी मां को लोगों ने पैरों तले रौंद दिया। उत्तर प्रदेश के हरदोई निवासी और दिहाड़ी मजदूर 40 साल के जगुनंदन को सिर और पैर में चोट आई है। उन्होंने बताया कि वह घटना के समय पटरियों पर नहीं थे लेकिन जब रावण जलने लगा तो आगे की तरफ मौजूद भीड़ पीछे हटने लगी और वह भी धक्का लगने से पीछे हो गए।  

अपनी मां परमजीत कौर के साथ रावण दहन देखने गई सात साल की खुशी की आंखों के सामने वह दर्दनाक मंजर अभी भी तैर रहा है। वह उस वक्त पटरियों पर गिर गई थी और उसे सिर में चोट लग गई। घायल हुए कई लोगों ने उस क्षण को याद करते हुये बताया कि उन्हें वहां आ रही ट्रेन का हॉर्न सुनाई नहीं दिया। एक और ट्रेन कुछ देर पहले ही वहां से गुजरी थी। पटाखों के शोर में ट्रेन की आवाज दब गई।