घर खरीददारों को आम्रपाली ने ऐसे लगाया 3000 करोड़ का चूना

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (5 दिसंबर): हाउसिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी आम्रपाली पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना शिकंजा कस दिया है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त के बाद आम्रपाली ग्रुप ने माना है कि उसने होम बायर्स के तकरीबन 3000 करोड़ रुपये दूसरी कंपनी में लगा दिए। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और जेल में डालने की चेतावनी के बाद आम्रपाली ग्रुप के सीएमडी ने माना है कि उसने होम बायर्स से जुटाए पैसों में से तकरीबन 2,996 करोड़ रुपये दूसरी कंपनी का बिजनस बढ़ाने में लगा दिए गए और इसी वजह से हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स पूरा करने के लिए जरूरी पैसों की किल्लत हो गई और तमाम प्रॉजेक्ट्स अटक गए। साथ ही आम्रपाली ने ग्रुप ने माना है कि 2,996 करोड़ रुपये के डायवर्जन का आंकड़ा मार्च 2015 तक का ही है क्योंकि उसके बाद से बैलेंसशीट अपडेट ही नहीं की गई है।आपको बात दें कि आम्रपाली के सैकड़ों हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स हैं, जिनमें नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा के वे 170 टावर शामिल हैं जिनमें 46 हजार होम बायर्स संस्थानों एवं प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के जरिए भी 4,040 करोड़ रुपये जुटाए। 2015 तक की बैलेंस शीट और कुछ कच्चे-पक्के आंकड़ों का हवाला देते हुए आम्रपाली ग्रुप ने दावा किया कि उसने इन हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स में 10 हजार 300 करोड़ रुपये निवेश किए।आम्रपाली ग्रुप के सीएमडी अनिल शर्मा ने ऐफिडेविट के जरिए सुप्रीम कोर्ट को सभी 46 ग्रुप कंपनियों के लेनदेन की जानकारी दी है। आम्रपाली ने अपने एफिडेविट में कहा कि 5,980 करोड़ रुपये मॉल्स और रेजॉर्ट्स बनाने, जमीन खरीदने, ऑफिस के संचालन में तथा बैंकों एवं होम बायर्स को पैसे वापस करने पर खर्च किए। साथ ही अनिल शर्मा ने कोर्ट के बताया कि आम्रपाली ग्रुप ने जुटाई गई रकम से 667 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च किए और यह रकम ठेकेदारों को देनी है। उन्होंने आम्रपाली की उन 9 कंपनियों की लिस्ट दी जहां से होमबायर्स के पैसे दूसरी कंपनियों में लगाए गए।