GOOGLE सर्च चीफ अमित सिंघल छोड़ रहे कंपनी, परिवार को देंगे वक्त

नई दिल्ली(5 फरवरी): सर्च इंजन गूगल के अमित सिंघल 26 फरवरी को कंपनी छोड़ने जा रहे हैं। सिंघल ऐसा परिवार को ज्यादा वक्त देने के लिए कर रहे हैं। 2000 में गूगल से जुड़ने वाले सिंघल लंबे समय तक इंटरनेट सर्च बिजनेस के हेड रहे।

गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट ने सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (सर्च) सिंघल की जगह जॉन गियनॉड्रिया को अप्वाइंट किया है। उत्तर प्रदेश के झांसी में जन्मे 47 साल के अमित सिंघल ने 1989 में आईआईटी रुड़की से कंप्यूटर साइंस में डिग्री हासिल की।इसके बाद उन्होंने मिनेसोटा यूनिवर्सिटी से एमएस की पढ़ाई की। वहीं कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से पीएचडी की।

गूगल ज्वॉइन करने से पहले अमित एटीएंडटी लैब के टेक्निकल स्टॉफ में थे। सिंघल को उनके बेहतरीन काम के लिए नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग, एशियन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।

गूगल प्लस सोशल नेटवर्क पर अपनी पोस्ट ‘द जर्नी कंटीन्यूज’ में सिंघल ने क्या लिखा

'' डियर फ्रेंड्स! मेरी जिंदगी सपनों के सफर की तरह रही है। एक छोटा बच्चा जो कभी हिमालय की गोद में बड़े होते हुए स्टार ट्रेक कंप्यूटर के सपने देखा करता था। एक दिन अचानक अमेरिका पहुंच जाता है। वह भी दो सूटकेस के साथ और ज्यादा कुछ नहीं। बाद में उसे गूगल में सर्च के प्रमुख जैसी अहम जिम्मेदारी सौंप दी जाती है। मेरी जिंदगी में आए हर मोड़ ने मुझे एनरिच किया और मुझे एक बेहतर इंसान बनाया है। गूगल में 15वां साल शुरू होने पर मैंने खुद से एक सवाल पूछा था कि तुम अगले 15 साल में क्या करना चाहोगे? जवाब था, दूसरों के लिए काम। जिंदगी में बदलाव का यह सही वक्त है। गूगल सर्च पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है। कंपनी की टॉप लीडरशिप इसे हर रोज बेहतर बनाने में जुटी है। गूगल सर्च ने लोगों की जिंदगियां बदली हैं। आज एक अरब से ज्यादा लोग हम पर भरोसा करते हैं। जानकारी से लोगों को मजबूत बनाना हमारा मिशन रहा है। इसके असर को दुनियाभर में अनदेखा नहीं किया जा सकता। मैंने जब शुरुआत की थी, तब किसने कल्पना की होगी कि 15 साल के छोटे समय में हम सिर्फ एक बटन क्लिक कर पूछेंगे और जवाब आपके सामने होगा। लेकिन आज यह नॉर्मल बात हो गई है। मेरा स्टार ट्रेक कंप्यूटर का सपना आज हकीकत बन गया है और यह मेरी इमेजिनेशन से कहीं ज्यादा बेहतर है। मैं गूगल से प्यार करता हूं। यह एक ऐसी कंपनी है जो सही चीजें करने में भरोसा करती है। ऐसी कंपनी जो दुनिया की बेहतरी के लिए काम करने में यकीन करती है। ऐसी कंपनी जो आपकी फिक्र करती है। मैं शुक्रगुजार हूं कि मैं इसका एक हिस्सा बना। लेकिन मुझे अगले 15 साल में क्या करना है अब यह तय करना जरूरी हाे गया है। 26 फरवरी 2016 को गूगल में मेरा आखिरी दिन होगा।   सिंघल की जगह जॉन गियनॉड्रिया ले रहे हैं। वे गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट में अभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस देखते हैं। गूगल की यह विंग वॉइस कमांड्स, यूजर शेड्यूल में बदलाव पर अलर्ट सिस्टम और आॅटोमैटिक कार ड्राइविंग जैसे प्रोजेक्ट पर काम कर रही है।