मेरठ रैली में जम कर गरजे अमित शाह, कहा...

नई दिल्ली (30 जून): यूपी के महाभारत में पश्चिम नई प्रयोगशाला बन गया है। आज बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह मेरठ में एक रैली में जम कर गरजे। कैराना में पलायन के मुद्दे पर अखिलेश सरकार पर जमकर हमला बोला। लेकिन, बड़ा सवाल ये है कि क्या पश्मिची यूपी अमित शाह की नई प्रयोगशाला बन चुका है।

पश्चिमी यूपी की राजधानी माने जाने वाले मेरठ में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह बूथ सम्मेलन में आए तो कैराना फिर उनके एजेंडे में सबसे ऊपर रहा। बीजेपी की पूरी कोशिश है कि मुद्दा ठंडा नहीं होना चाहिए और इसके लिए पश्चिमी यूपी में लगातार माहौल को गर्म रखा जाए। बूथ सम्मेलन के जरिए यूपी के अलग-अलग इलाकों में कार्यकर्ताओं में जोश भर रहे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की मेरठ रैली से उनके पश्चिम यूपी के बीजेपी के प्लान को समझना जरुरी है।

दरअसल मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल में कुल 71 विधानसभा सीटे हैं। जब यहां 65 सीटे हुआ करती थी तब बीजेपी ने 41 सीटें तक जीती हैं। इन तीनों मंडलों में कुल 14 जिले हैं, इन 14 जिलों में 14 लोकसभा सीटे हैं जो सारी की सारी बीजेपी के पास है। इसलिए पश्चिमी यूपी की इन 71 सीटों में कम से कम 50 सीटें जीतने की बीजेपी ने रणनीति बनाई है। साथ ही इसके लिए हिन्दुत्व से जुड़े छोटे मुद्दे को भी बड़ा बनाकर पेश किया जाएगा।

वीएचपी और बजरंग दल जैसे संगठन भी इस इलाके में हो हल्ला मचाकर बीजेपी के लिए माहौल बनाते रहेंगे। न्यूज24 को मिली जानकारी के मुताबिक मोदी सरकार में होने वाले मंत्रिपरिषद विस्तार में भी इस इलाके के एक सांसद को मंत्री बनाया जा सकता है। बीजेपी ने इलाके के हिसाब से रणनीति बनाई है..पश्चिमी यूपी में पार्टी संगठन के लोग हिन्दुत्व के मुद्दे को ललकारते रहेंगे और मोदी सरकार के मंत्री विकास के मुद्दे पर रैलियां करेंगे। इसके अलावा यूपी के इस इलाके में हर महीने बीजेपी की एक बडी रैली हुआ करेगी। यूपी में बीजेपी की एक रणनीति ये भी कि पश्चिमी यूपी के मुकाबले पिछड़े पूर्वांचल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम ज्यादा हुआ करेंगे।

बार-बार मथुरा की बात भी बीजेपी सोची समझी रणनीति के तहत उठा रही है। एक तो यादव विरोधी पिछड़े वर्ग को लुभाने के लिए दूसरा कानून व्यवस्था पर हमला। खास बात ये कि बीजेपी की इस रणनीति को भांपकर ही पश्चिमी यूपी में समजावादी पार्टी ने भी पैंतरा खेला। 

समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह के कहने पर शिवपाल सिंह यादव ने जाट वोटों की खातिर और मुस्लिम-जाट गठबंधन के लिए चौधरी अजीत सिंह की पार्टी रालोद से गठबंधन की बात शुरु की। लेकिन अखिलेश यादव के बदले सुर से ये मामला आगे नहीं बढ़ पाया है। लेकिन फिर भी समाजवादी पार्टी सतर्क है। पश्चिमी यूपी में बीजेपी को सरकार बनाने की सबसे उपजाऊ सियासी जमीन दिखाई दे रही है और दादरी से लेकर मुजफ्फरनगर और कैराना की घटनाओं ने उसके एजेंडे को आगे बढ़ाने का भी काम किया है।