ट्रंप का परमाणु हथियारों को लेकर खतरनाक बयान

वॉशिंगटन (23 दिसंबर): अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप 20 जनवरी को अपना पदभार संभालेंगे। लेकिन उससे तकरीबन एक महीना पहले डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की रक्षा नीति में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। ट्रंप ओबामा प्रशासन के उलट रक्षा नीति में बड़े बदलाव की तैयारी में हैं। बामा प्रशासन परमाणु हथियारों में कमी लाने और धीरे-धीरे उसके उन्मूलन पर जोर देता रहा है। वहीं ट्रंप ने ट्वीट कर परमाणु हथियारों के जखीरे को मजबूती और विस्तार देने की बात कही है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक ट्रंप का ताजा ट्वीट अमेरिका-रूस के बीच परमाणु हथियारों की होड़ को बढ़ावा दे सकता है।

ट्रंप ने ट्वीट किया है कि जब तक परमाणु हथियारों के मामले में दुनिया को समृद्धि नहीं आती, तब तक अमेरिका को अपनी परमाणु क्षमताओं को अत्यधिक मजबूती और विस्तार देना चाहिए। द वॉशिंगटन पोस्ट ने इसे अमेरिकी सुरक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव बताया है। वहीं अमेरिका में परमाणु अप्रसार की मजबूत लॉबी ने आगामी राष्ट्रपति की ओर से आए ऐसे बयान पर अपनी चिंता जाहिर की है।

सेंटर फॉर आर्म्स कंट्रोल एंड नॉन-प्रलिफरेशन के कार्यकारी निदेशक और 18 साल तक कांग्रेस के सदस्य रह चुके जॉन टियरने ने कहा है कि महज 140 अक्षरों का इस्तोमाल कर अमेरिका में एक बड़े बदलाव की घोषणा कर देना नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के लिए खतरनाक है। परमाणु हथियार नीति बारीक, जटिल है और यह इस ग्रह के हर व्यक्ति को प्रभावित करती है।

टियरने के मुताबिक शीतयुद्ध के बाद से यह द्विपक्षीय सहमति बनी रही है कि अमेरिकी रक्षा नीति में परमाणु हथियारों पर निर्भरता कम होनी चाहिए और परमाणु युद्धक सामग्री के भंडार में कमी आनी चाहिए। परमाणु हथियारों के विस्तार का आह्वान इस आम सहमति को तोड़ता है। यह अमेरिका को रूस के साथ हुई प्रमुख हथियार नियंत्रण संधि के उल्लंघन की स्थिति में ला देगा। यह निश्चित तौर पर नए परमाणु हथियारों की एक दौड़ शुरू कर देगा।

इस समय 7000 से ज्यादा मुखास्त्र रखने वाले अमेरिका के पास परमाणु हथियारों का सबसे बड़ा जखीरा है। इसके बाद रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन का स्थान है। जानकारों के मुताबिक अधिक परमाणु हथियार बनाना या परमाणु विस्फोटक शक्ति बढ़ाना बाकी दुनिया को यह संदेश देता है परमाणु अप्रसार अब अमेरिका का मुख्य लक्ष्य नहीं रह गया। यह विनाशकारी परमाणु दुर्घटना या आदान-प्रदान की आशंकाएं भी बढ़ा देगा। अमेरिकी परमाणु हथियारों की नीति को इतना अधिक बदल देने के संभावित परिणामों की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

गौरतलब है कि परमाणु हथियारों के मुद्दे पर यह बयान देने से एक ही दिन पहले ट्रंप ने पेंटागन के शीर्ष जनरलों से मुलाकात की थी। इन जनरलों में रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता एवं परमाणु एकीकरण के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ, वायुसेना के लेफ्टिनेंट जनरल जैक वीनस्टीन भी शामिल थे। मौजूदा योजनाएं पहले ही अमेरिकी परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण और रखरखाव के लिए एक खरब डॉलर खर्च करने का आह्वान कर चुकी हैं।