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यूएन में पाक के खिलाफ भारत को बड़ी कामयाबी-मसूद अजहर के खिलाफ फ्रांस रखेगा प्रस्ताव

जहां अमेरिका ने भारत को दिये जा रहे सहयोग और आश्वासन को दोहराया है वहीं फ्रांस ने कहा है कि वो मौलाना मसूद अजहर को आतंकियों की सूची में डाले जाने के लिए संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव ला रहा है

न्यूज24 ब्यूरो नई दिल्ली(19 फरवरी): पुलवामा हमले के बाद भारत को पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई के लिए कूटनीति और रणनीतिक सहयोग मिलना शरू हो गया है। एक तरफ अमेरिका ने आज फिर कहा है कि हम भारत के साथ आतंक के खिलाफ कार्रवाई के लिए दृढ़संकल्पित हैं। पुलवामा हादसे ने अमेरिका के इस संकल्प को और अधिक मजबूत किया है। बंगलुरू में अमेरिकी राजदूत ने कहा कि कैन जस्टर ने कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों की नर्सरी को खत्म करने के लिये न केवल दबाव बनाया बल्कि उन्हें दी जा रही आर्थिक मदद पर भी रोक लगाई है। 

जहां अमेरिका ने भारत को दिये जा रहे सहयोग और आश्वासन को दोहराया है वहीं फ्रांस ने कहा है कि वो मौलाना मसूद अजहर को आतंकियों की सूची में डाले जाने के लिए संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव ला रहा है। पिछली बार 2017 में भी फ्रांस ही मौलाना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र की काली सूची में डालने के लिए प्रस्ताव लाया है। उस वक्त भी इंग्लैण्ड और जर्मनी ने अनुमोदन किया था और लगभग सभी सदस्य देशों ने प्रस्ताव के समर्थन में थे लेकिन चीन अपनी वीटो पॉवर का इस्तेमाल कर प्रस्ताव को खारिज करवाने मे सफल रहा था। भारत ने इस बार चीन से कई मुद्दों पर व्यापक बातचीत की है। चीन ने भी अपने रुख में परिवर्तन के संकेत दिये हैं,लेकिन चीन आखिरी समयपर क्या रुख रखेगा यह कहना मुश्किल है।

 ऐसा भी कहा जा रहा है कि चीन मौलाना मसूद अजहर को आतंकियों वाली काली सूची में डालने का विरोध न करने के बदले से बड़ा मोलभाव करना चाहता है, और वो यह भी चाहता है कि इस मोलभाव का दुनिया के बाकी देशों को पता न चले। हालांकि चीन की महत्ता को देखते हुए भारत ने चीन के विद्रोहियों के नेता का वीजा रद कर दिया था। इसके बावजूद 2107 में चीन ने आखिरी मौके पर भारत को धोखा ही दिया था।

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