दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी है भारतीय सेना, -50 डिग्री में भी करती है सीमा की सुरक्षा

नई दिल्ली(24 सितंबर): भारतीय सेना पर हर भारतीय को गर्व है और हो भी क्यों न, यह भारतीय सेना ही जो भारत को हमेशा दुश्मनों से दूर रखती है। भारतीय सैनिक अपनी जान पर खेल कर हमारे वतन को सुरक्षित और स्वतन्त्र बनाये रखते है। उनकी वीरता और कर्त्तव्य-भावना के लिए पूरा देश उन्हें सम्मान की नज़रों से देखता है। वैसे तो हम में से लगभग सभी को उनके योगदान और उनकी उपलब्धियों के बारे में कुछ न कुछ तो पता ही है। परन्तु यहां हम जिन बातों का जिक्र करने जा रहे हैं, उससे आपका भारतीय सेना के प्रति सम्मान और बढ़ जाएगा।

- सियाचिन ग्लेशियर दुनिया का सबसे ऊंचाई पर स्थित रणक्षेत्र है, जो कि समुद्र तल से 5000 मीटर की ऊंचाई पर है। यहाँ पर तापमान -50 डिग्री से नीचे चला जाता है और इतने कठिन वातावरण में भारतीय सेना हर पल सीमा की सुरक्षा करती रहती है।

- भारतीय सेना चीन और अमेरिका के बाद विश्व की सबसे तीसरी बड़ी सेना है। भारत की पूरी सेना में 13 लाख 25 हजार सक्रिय सैनिक और 21 लाख 43 हजार से भी अधिक रिज़र्व सैनिक है।

- 1970 के आरम्भ और 1990 के आखिर में भारत ने गुपचुप तरीके से अपने परमाणु परिक्षण कर लिया और अमेरिका के गुप्तचर संगठन सीआईए को इसकी भनक तक नहीं लगी। इन घटनाओं को आज तक सीआईए की एक बड़ी विफलता और भारतीय सेना की एक बड़ी सफलता माना जाता है। 

- लोंगेवाला की लड़ाई बहुत ही मशहूर लड़ाई है। बाद में जिसकी कहानी से प्रभावित होकर बॉलीवुड में ‘बॉर्डर’ नाम से एक फिल्म भी बनाई गई| यह लड़ाई सन् 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी। इसमें जहाँ एक तरफ तो 2000 पाकिस्तानी सैनिक थे, तो दूसरी तरफ सिर्फ 120 भारतीय सैनिक थे। भारतीय सैनिकों के पास एक जीप पर लगी हुई एक एम40 रिक्वाइल-लेस के अलावा कोई भी विशेष घातक हथियार नहीं था। वहीँ दूसरी ओर पाकिस्तानी सैनिकों के पास 45 टैंक और एक मोबाइल इन्फेंट्री ब्रिगेड था। बहुत ही कम संख्या और लगभग हथियार-विहीन होने की विपरीत परिस्थितियों में भी भारतीय सैनकों ने दुश्मनों को अपनी पीठ नहीं दिखाई। वो मैदान-ए-जंग में पूरी रात तब तक डटे रहे जब तक कि उनकी मदद को सुबह वायुसेना न आ गई और दुश्मनों को उल्टे पैर भागने को मजबूर न कर दिया।

- भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी “स्वैच्छिक” सेना है। भारतीय संविधान में अनिवार्य भर्ती (जबरन भर्ती) का प्रावधान होते हुए भी भारतीय सेना को अपने पूरे इतिहास में कभी भी ऐसा करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। पूरी सेना का हर-एक सैनिक अपने स्वयं की इच्छा से इसमें शामिल हुआ है।

- भारत की अन्य सरकारी संगठनों एवं संस्थाओं के विपरीत, भारतीय सेना में जाति या धर्म के आधार पर किसी भी तरह के आरक्षण का प्रावधान नहीं है। सैनिकों को उनके परिक्षणों में केवल उनके द्वारा प्रदर्शित की गई उनकी योग्यताओं और शारीरिक क्षमताओं के आधार पर ही चुना जाता है।

-1971 में भारत-पाक युद्ध, 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों और अधिकारियों के आत्मसमर्पण के साथ ख़त्म हुआ। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद, युद्धबंदियों को इतनी बड़ी संख्या में हिरासत में लेने की यह सबसे बड़ी घटना है। यही वह युद्ध था जिसकी समाप्ति ने एक स्वतन्त्र बांग्लादेश की नींव रखी।