हो सकती थी और भयावह स्थिति, ड्राइवर सलीम ने ऐसे बचाई 50 से ज्यादा की जान

श्रीनगर (11 जुलाई): जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में कल रात साढ़े आठ बजे के करीब आतंकियों ने खुनी खेल खेला। आतंकियों ने यहां अमरनाथ तीर्थ यात्रियों की बस पर हमला कर दिया। इस हमले में 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। जबकि 19 यात्री घायल हो गए। आतंकी हमले के वक्त बस में 50 से ज्यादा तीर्थ यात्री मौजूद थे। आतंकी न सिर्फ तीथ यात्रियों की हत्या करना चाहते थे बल्कि बस को भी अपने कब्जा में लेना चाहता था। लेकिन बस के ड्राइवर सलीम की सूझबूझ की वजह से आतंकी अपने नापाक मंसूबे में कामयाब नहीं हो सका।


बस में सवार तीर्थ यात्रियों की माने तो अगर बस का ड्राइवर सलीम हिम्मत नहीं दिखाता तो ये मंजर और ज्यादा भयावह हो सकता है। ड्राइवर सलीम ने उन खौफनाक लम्हों को याद करते हुए कहा, 'आठ बजे के आसपास बस पर सामने से फायरिंग हुई। फायरिंग हद से ज्यादा हो रही थी। मैं गाड़ी चलाता रहा। तभी मैं झुका और एक गोली बगल में बैठे मेरे साथी को लगी।' उन्होंने कहा, 'लगातार फायरिंग हुई। मैं इसलिए रुका नहीं और बस को चलाता रहा।' सलीम ने कहा कि उस वक्त खुदा ने मुझे आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी और मैं रुका नहीं।'


गुजरात के वलसाड में रहने वाले ड्राइवर सलीम के भाई जावेद ने कहा, 'वह 7 लोगों की जान नहीं बचा पाया, लेकिन उन्होंने 50 लोगों को एक सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया हमें उन पर गर्व है।'

हमले के बाद बस में सवार यात्रियों के मुताबिक उनकी बस अनंतनाग से 2 किमी दूर पंचर हो गई थी, जिसे बनाने में देर हो गई। जैसे ही बस निकली आतंकियों ने हमला कर दिया।


बस के एक यात्री के अनुसार वो लोग 5-6 की संख्या में थे और ताबड़तोड़ गोलियां बरसा रहे थे। हमने ड्राइवर से कहा की बस भगाता रह। वहीं एक अन्य यात्री योगेश के अनुसार बस निकलते ही अचानक गोलियां बरसनी शुरू हो गई और हमारे ड्राइवर सलीम ने हिम्मत दिखाते हुए बस नहीं रोकी। आतंकी मिलिट्री कैंप तक बस पर गोलियां दागते रहे। यह चमत्कार ही है कि इतने लोगों में से 7 लोगों की मौत हुई और बाकि बच गए।


पुलिस के मुताबिक बस नियम विरुद्ध सात बजे के बाद हाईवे पर गई। सात बजे बाद हाईवे पर यात्रा की अनुमति नहीं है। जानकारी के अनुसार यह बस रजिस्टर्ड नहीं थी। रोड ओपनिंग पार्टी, जिसके जरिए लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती थी वो 7:30 बजे वापस आ गई थी। बस पर हमला 8.20 बजे बैटनगो में हुआ जब वो तीर्थयात्रियों को दर्शन करा के बालटाल से मीर बाजार लौट रही थी।