बाहरी के मुद्दे पर अमर सिंह बोले- अखिलेश मेरा बेटा, नहीं लिया किसी का नाम

लखनऊ (14 सितंबर): अपने चाचा से तकरार के बीच अखिलेश ने जिस बाहरी का नाम लिया आखिर वो कौन है। अगर नाराजगी बाहरी से है तो चाचा शिवपाल से क्य़ों गुस्सा हैं। दरअसल अमर सिंह, जया प्रदा, बेनी प्रसाद वर्मा, मुख्तार अंसारी और दीपक सिंघल की एसपी वापसी के लिए शिवपाल जिम्मेदार हैं और अखिलेश इनकी वापसी नहीं चाहते थे।

अखिलेश चुनावों में जीत के लिए अपने विकास कार्य को आगे रखना चाहते हैं, जबकि शिवपाल समझते हैं कि गठबंधन को यूपी में विकास के अलावा जातिगत समीकरण में भी मजबूत करना जरूरी है। सोच का ये अंतर कब झगड़ा बन जाएगा, इसका इल्म मुलायम को भी नहीं था। तभी तो अपने घर पर मुलायम करीब 3 घंटे तक शिवपाल को मनाते रहे, क्योंकि वो जानते हैं कि शिवपाल की पार्टी कार्यकर्ताओं में क्या हैसियत है और उसका इशारा शिवपाल के समर्थन में हुई नारेबाजी भी देती है।

इधर शिवपाल को मनाने के लिए मुलायम जुटे हैं, उधर अमर सिंह ने भी कह दिया कि वो भतीजे की किसी बात का बुरा नहीं मानेंगे। अमर सिंह ने ये भी कहा कि अखिलेश ने किसी का नाम नहीं लिया, इसलिए वो नाराज नहीं। वो नहीं मानते कि अखिलेश कभी उन्हें बाहरी कह सकते हैं। अखिलेश ने मुझे आज तक कुछ नहीं कहा। अगर वे मुझे मारेंगे तो मैं उनसे पूछूंगा बेटा कहीं हाथ में चोट तो नहीं लगी। उनको ऑस्ट्रेलिया पढ़ाई के लिए मैं ही लेकर गया, उनकी शादी भी करवाई।

घर का झगड़ा अब बाहर आ चुका है। ऐसे में उस बाहरी की पहचान हो पाई हो या ना, जिसका जिक्र अखिलेश ने किया है। लेकिन बाहर विरोधी पार्टियां घर के झगड़ें का मजाक बनाने से नहीं चूक रहीं। दीपक सिंघल को जैसे ही हटाया गया, वैसे ही अखिलेश यादव औऱ शिवपाल के रिश्तों में घुली कड़वाहट सामने आ गई। सियासी गलियारे में चर्चा आम है क‍ि दीपक सिंघल अमर सिंह और शिवपाल के करीबी हैं। ऐसे में अखिलेश को लगने लगा था कि चीफ सेक्रेटरी के पद पर दीपक सिंघल शायद उनके हुक्म को अच्छी तरह से अमल में ना ला पाएं।

इसके अलावा मुख्तार अंसारी की पार्टी का विलय और बेनी प्रसाद और अमर सिंह की वापसी भी अखिलेश के शायद ना पची हो, क्योंकि खबर आई थी कि ये फैसले बिना अखिलेश की सहमति के हुए। लेकिन सवाल ये कि अगर बेटे के अनदेखी चाचा शिवपाल कर रहे थे तो पापा मुलायम क्यों खामोश रहे।