हमेशा से एक क्रांतिकारी पुलिस अधिकारी बनना चाहती थी: श्रेष्ठा ठाकुर

नई दिल्ली(5 जुलाई): बीजेपी नेता और जिला पंचायत सदस्य के पति को जेल भेजने और फेसबुक पर टिप्पणी करने के बाद चर्चाओ में आईं बुलंदशहर की सीओ श्रेष्ठा ठाकुर हमेशा से एक क्रांतिकारी पुलिस अधिकारी बनना चाहती थीं। 32 साल की श्रेष्ठा ने जब वर्दी पहनी तो बुलंदशहर में अपनी पहली पोस्टिंग से उन्होंने लोकप्रियता हासिल कर ली। 

- श्रेष्ठा ने कहा कि वह हमेशा से पुलिस ऑफिसर बन राष्ट्र की सेवा करना चाहती थीं। उन्नाव की रहने वाली श्रेष्ठा की पढाई कानपुर में हुई। उन्होंने कहा कि 12वीं पास करने के बाद मैंने कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक किया. मेरे दोस्त मुझे बतौर पुलिस ऑफिसर की तरह देखते थे।

- एमबीए करने के दौरान श्रेष्ठा का चयन यूपीपीसीएस में हुआ। ट्रेनिंग करने के बाद श्रेष्ठा की पहली पोस्टिंग 15 सिंतबर 2016 को बुलंदसहर में हुई, वहां भी उनकी छवि एक सख्त अधिकारी थी।

- बता दें कि बीजेपी नेता को पिछले महीने बुलंदशहर में ट्रैफिक नियमों की अवहेलना करने पर जेल भेजने की वजह से चर्चा में आई डीएसपी श्रेष्ठा सिंह का ट्रांसफर कर दिया गया है। ट्रांसफर की वजह से एक बार फिर से वह चर्चा का विषय बनी हुई हैं। श्रेष्ठा सिंह ने अपने ट्रांसफर के बाद 'As Thakur' के नाम से बने फेसबुक अकाउंट पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। श्रेष्ठा ने लिखा है 'जहां भी जाएगा, रोशनी लुटाएगा, किसी चराग का अपना मकां नहीं होता।' इसके साथ ही श्रेष्ठा ने यह भी बताया कि उनका ट्रांसफर बहराइच पर कर दिया गया है।