अयोध्या में राम मंदिर मुद्दे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का ये था फैसला

नई दिल्ली ( 21 मार्च ): राम मंदिर मुद्दे पर सुप्रीमकोर्ट ने अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने सभी पक्षों से कहा है कि वह कोर्ट के बाहर इस मुद्दे को बातचीत से हल करने की कोशिश करें। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर जरूरत पड़ती है तो सुप्रीम कोर्ट के जज मध्यस्थता करने को तैयार हैं।


आपकी जानकारी के लिए बतात दें कि इस मुद्दे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 में अपना फैसला सुनाया था। जिसके बाद हाईकोर्ट के फैसले को देश के सर्वोच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।


यह था हाईकोर्ट का फैसला

30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राम मंदिर मुद्दे पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित जमीन का एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े में जमीन बांटने का फैसला दिया।


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोध्या के विवादित स्थल को रामजन्मभूमि करार दिया था। हाईकोर्ट ने 2.77 एकड़ जमीन को तीन हिस्सों में बंटवारा किया था। इसमें से एक हिस्सा हिंदू महासभा को दिया गया जिसमें राम मंदिर बनना था। विवादित स्थल का तीसरा निरमोही अखाड़े को दिया गया था।


दूसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया था।