योगीराज में इस शर्त पर मुस्लिम सिपाही रख सकेंगे दाढ़ी

इलाहाबाद (5 मई): धार्मिक आधार अपर दाढ़ी रखकर पुलिस की नौकरी करने की इजाजत मांगने वाले बिजनौर जिले के सिपाही नईम अहमद को फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने इस मामले में सीधे तौर पर दखल देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने अंतिम फैसला पुलिस विभाग के अधिकारी पर ही छोड़ा है कि वो किस मुस्लिम वर्दीधारी को दाढ़ी रखने की इजाजत देता है और किसे नहीं देता ? यानी कि दाढ़ी रखने की ये एक शर्त है कि दाढ़ी रखने के लिए कप्तान की इजाजत लेनी होगी।


दरअसल यूपी पुलिस के एक मुस्लिम सिपाही ने ड्यूटी पर दाढ़ी रखने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सिपाही ने महकमे के क्लीन सेव के नियम को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई और दाढ़ी रखने की अनुमति मांगी गई। हाईकोर्ट ने सुनवाई शुरू की तो सिपाही की ओर से धार्मिक मान्यताओं की दलील दी गई। साथ ही मुस्लिमों के लिए 1985 में जारी सर्कुलर का हवाला दिया गया।


अदालत ने इस मामले को निस्तारित करते हुए एसपी को आदेश दिया कि वो दो महीने में निर्णय लें कि सिपाही को दाढ़ी रखनी है या नहीं। कोर्ट ने इस मामले में सीधे तो कोई आदेश नहीं दिया लेकिन अब एसपी चाहेंगे तो यूपी पुलिस का सिपाही ऑन ड्यूटी दाढ़ी में नजर आएगा।


दाढ़ी को लेकर विवाद मामला यूपी के बिजनौर का है। बिजनौर पुलिस लाइन में तैनात सिपाही नईम अहमद ने दाढ़ी रखने के लिए अपने अधिकारी से इजाजत मांगी। लेकिन नईम को नियमावली बताते हुए ऑन ड्यूटी क्लीन सेव रहने की हिदायत दी गई। विवाद बढ़ा तो नईम ने बगावत कर दी। नईम ने दाढ़ी रखने की इजाजत के लिए यूपी पुलिस को अदालत में खीचा और हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने करते हुए एसपी बिजनौर को आदेशित किया कि पुलिस लाइन में तैनात सिपाही नईम को दाढ़ी रखने की अनुमति देने के मामले में नियमानुसार दो महीने में निर्णय लें।