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INSIDE STORY: पाकिस्तान में आतंकी हमले से चीन की उड़ी नींद, जानिए क्यों...

डॉ. संदीप कोहली,​ 

नई दिल्ली (25 अक्टूबर): पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा में सोमवार रात 11.30 बजे पुलिस ट्रेनिंग कैंप पर हमला होता है लेकिन हमले की गूंज 4,500 किमी दूर बीजिंग तक गूंजती है। बीजिंग जो चीन की राजधानी है और सरकार की सत्ता का केंद्र। इस आतंकी हमले ने चीन की चिंता जरूर बड़ा दी है। अब सवाल उठ रहा होगा कि हमला तो पाकिस्तान में हुआ लेकिन चीन क्यों चितिंत है? तो उसका सबसे बड़ा कारण है चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी CPEC। CPEC चीन की वो महत्वकांशी परियोजना है जिसके जरिए चीन भारत को घरने की कोशिश कर रहा है। 46 अरब डॉलर यानी लगभग 3 लाख करोड़ रुपए की इस परियोजना के तहत चीन गिलगिट-बल्टिस्तान से बलूचिस्तान के ग्वादर पोर्ट तक 1800 किमी लम्बे सड़क और रेल मार्ग का निर्माण कर रहा है। बलूचिस्तान का ग्वादर पोर्ट सामरिक और आर्थिक दृष्टि से चीन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारत को समंदर में घेरने के लिए चीन 'string of pearls' यानी सागरमाला बना रहा है। इसी कड़ी में वह पाकिस्‍तान के इस बंदरगाह पर कब्जा जमाना चाहता है ताकि युद्ध के समय वह भारत पर कई ठिकानों से एक साथ हमला कर सके। लेकिन आज चीन की CPEC परियोजना संकट में है। संकट बलूचिस्तान में फैले आजादी के आंदोलन से। संकट बलूचिस्तान में हो रहे आतंकी हमलों से। 

चीन को किस बात का डर है... - चीन इस CPEC परियोजना के माध्यम से शिंजियांग प्रांत को ग्वादर पोर्ट से जोड़ना चाहता है।  - ग्वादर बलूचिस्तान में है और यहां चीनी दखल से बलोच पहले से ही नाराज हैं।  - बलोच जनता पाकिस्तान के अंदर और बाहर CPEC परियोजना का विरोध कर रही है। - अब पीएम मोदी ने लाल किले से बलूचिस्तान का जिक्र कर चीन की चिंता बड़ा दी है। - चीन को डर है कि पीएम मोदी के जिर्क के बाद बलोच आंदोलन और जोर पकड़ सकता है। - जिससे कॉरिडोर का काम प्रभावित होगा, चीन को आर्थिक और सामरिक नुकसान हो सकता है। - हाल ही में बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) के प्रमुख अल्लाह नजर बलूच ने चीन को धमकी दी थी। - चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुवांग ने कहा है कि चीन CPEC को लेकर चिंतित है। - इसके लिए चीन अपनी आर्मी इस कॉरिडोर के तहत आने वाले प्रोजेक्ट पर तैनात कर रहा है।

चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) से जुड़ी अहम बातें... - चीन ने सीपीईसी परियोजनाओं में 46 अरब डॉलर यानी लगभग 3 लाख करोड़ रुपए निवेश किया है। - इस प्रोजेक्ट की शुरूआत 2015 में हुई थी, इसके पूरा होने तक 3 हजार किमी का रेल-सड़क नेटवर्क तैयार हो जाएगा। - सड़क नेटवर्क तैयार के साथ-साथ रेलवे और पाइपलाइन लिंक भी पश्चिमी चीन से दक्षिणी पाकिस्तान को जोड़ेगा। - अभी चीन को ग्वादर पोर्ट जाने के लिए 12 हजार किमी के समुद्री मार्ग से सफर तय करना पड़ता है। - सीपीईसी प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद चीन को अपने बॉर्डर से सिर्फ 1800 किमी का सफर तय करना पड़ेगा। - बीजिंग से ग्वादर पोर्ट की दूसरी महज आधी से भी कम (5200 किमी) रह जाएगी। - चीन द्वारा बनाया जा रहा ये कॉरिडोर बलूचिस्तान प्रांत से होकर गुजरेगा, जहां दशकों से लगातार अलगाववादी आंदोलन चल रहे हैं।  - इसके साथ-साथ गिलगिट-बल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का इलाका भी शामिल है। - सीपीईसी, चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग के सिल्क रोड इकोनॉमिक बेल्ट और 21वें मेरीटाइम सिल्क रोड प्रोजेक्ट का हिस्सा है।  - चीन को उम्मीद है कि इस कॉरिडोर के जरिए वह अपनी ऊर्जा को तेजी से फारस की खाड़ी तक पहुंचा सकता है।  - चीन की योजना इन दोनों विकास योजनाओं को एशिया और यूरोप के देशों के साथ मिलकर आगे बढ़ाने की है। - वहीं, कॉरिडोर के जरिए पश्चिमी चीन में वित्तीय विस्तार मिलने की उम्मीद है, जो कि बंद इलाका है।  - इसके साथ-साथ चीन की योजना अपने गिलगिट-बल्टिस्तान में अपने पैर जमाने की है,जहां लगातार अलगाववादी आंदोलन हो रहे हैं। - सीपीईसी प्रोजेक्ट के लिए पाकिस्तान में मौजूद चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए करीब 21 हजार पाकिस्तानी सैनिक तैनात किए गए हैं। - अगस्त में गिलगिट-बल्टिस्तान और पीओके लोगों ने पाकिस्तान और चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया गया है।  - वहां के नागरिकों का आरोप है कि दोनों देश अपने फायदे के लिए इस इलाके के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं। - नागरिकों का आरोप है कि इस योजना में चीन के कामगारों को लगाया गया है, जबकि स्थानीय युवा बेरोजगार हैं।

ग्वादर पोर्ट में पाकिस्तान के गैस प्रोजेक्ट के लिए चीन नहीं बनाएगा टर्मिनल... - पाकिस्तान ग्वादर पोर्ट पर लिक्विफाइड नैचुरल गैस (LNG) का टर्मिनल बनाना चाहता है। - चीन इस प्रोजेक्ट को बिल्ड एंड ऑपरेट की तर्ज पर 14,000 करोड़ में तैयार करने वाला था।  - लेकिन बलूचिस्तान की वर्तमान स्थिती को देखते हुए चीन ने कदम पीछे खिंच लिए हैं। - चीन अब इसमें इंजीनियरिंग से जुड़े कामों में मदद जरूर करेगा लेकिन बाकी चीजों से दूर रहेगा।  - चीन के कदम खिंचते ही पहले से चरमराई पाकिस्तान की अर्थव्यस्था पर भारी बोझ पड़ने वाला है।

CPEC से चीन का गुलाम न बन जाए पाक... - CPEC को पाक सीनेट की एक विशेष कमेटी ने भी विफल करार दिया है। - सीनेट की स्थायी समिति के अध्यक्ष ताहिर मशहादी ने चीन पर लगाया है आरोप। - डॉन अखबार के अनुसार CPEC समुद्र के किनारे एक और ईस्ट इंडिया कंपनी है। - CPEC से पाकिस्तान के राष्ट्रीय हितों की रक्षा नहीं की जा रही है। - CPEC पर बलोचिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी आरोप लगाया है। - कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह प्रोजेक्ट बलोचियों के संसाधनों को लूटने का षडयंत्र है। - कार्यकर्ताओं ने हाल ही में लंदन में चीनी दूतावास के बाहर CPEC को लेकर प्रदर्शन भी किया। - प्रोजेक्ट की समीक्षा के लिए बनाई गई हैदर कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में इसे विफल माना है। - कमेटी ने कहा कि कॉरिडोर के 1,674 किमी पश्चिमी हिस्से में सरकार की प्राथमिकता में नहीं। - डॉन अखबार के अनुसार ग्वादार पोर्ट तक जो सड़क बननी थी वहां निर्माण संभव ही नहीं। - रिपोर्ट के मुताबिक पोर्ट बन भी गया तो बिजली नहीं मिलेगी क्योंकि ट्रांसमिशन लाइनों का काम ही नहीं हुआ।


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