GST से कैसे बदल जाएगी आपकी दुनिया? जानिए पूरी ABCD

नई दिल्ली (3 अगस्त) :  आखिर जिसका इंतज़ार था वो घड़ी आ ही गई। राज्यसभा में अगले बुधवार को जीएसटी बिल पर चर्चा होगी। लोकसभा में ये बिल पहले ही पास हो चुका है। सवाल ये है कि क्या इस हफ्ते दूर हो जाएगी जीएसटी पर राज्यसभा की फांस?

जीएसटी बिल के ज़रिए ऐसी नई अप्रत्यक्ष टैक्स व्यवस्था देश में लाने का इरादा है जिससे सभी 29 राज्य एक अकेले बाज़ार में तबदील हो जाए। पहले इसे 1 अप्रैल 2016 से देश में लागू करने की योजना थी। लेकिन राज्यसभा में विरोधी दलों का बहुमत होने की वजह से बिल का पास होना अटक गया। अब संसद के मौजूदा सत्र में जीएसटी बिल राज्यसभा में पास हो जाता है और सब सही रहता है तो जीएसटी 1 अप्रैल 2017 से हकीकत में तब्दील हो सकता है.

भारत में जीएसटी लागू करने का विचार पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी सरकार की ओर से 2000 में लाया गया। 2011 में मनमोहन सिंह सरकार ने जीएसटी पर बिल संसद में पेश किया लेकिन बीजेपी के विरोध की वजह से पास नहीं हो सका। मोदी सरकार की ओर से लाया गया जीएसटी संशोधन बिल 6 मई 2015 को लोकसभा में पास हुआ। लेकिन राज्यसभा में संख्याबल सरकार के साथ ना होने की वजह से ये बिल अभी तक अटका रहा।

जीएसटी के बारे में अहम बातें-

जीएसटी है क्या?

जीएसटी का पूरा नाम गुड्स (वस्तु) एंड सर्विस (सेवा) टैक्स है, जो केंद्र और राज्यों द्वारा लगाए अभी लगाए जा रहे 20 से अधिक अप्रत्यक्ष टैक्सों की जगह लेगा। ऐसा माना जा रहा है कि इस बिल के पास हो जाने से टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन आसान होगा। फिलहाल भारत में गुड्स और सर्विसेज़ के लिए अदा किए जाने वाले टैक्स की दरों में काफ़ी भिन्नता है। सर्विसेज़ के लिए टैक्स की दर 15 फ़ीसदी है जबकि गुड्स के लिए टैक्स की दर अलग-अलग है।

जीएसटी लागू होने के बाद कौन कौन से टैक्स ख़त्म हो जाएंगे?

जीएसटी लागू होने के बाद सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, एडिशनल कस्टम ड्यूटी (सीवीडी), स्पेशल एडिशनल ड्यूटी ऑफ कस्टम (एसएडी), वैट /सेल्स टैक्स, सेंट्रल सेल्स टैक्स, मनोरंजन टैक्स, ऑक्ट्रॉय एंड एंट्री टैक्स, परचेज टैक्स, लक्ज़री टैक्स खत्म हो जाएंगे।

कैसे वसूला जाएगा टैक्स नई व्यवस्था में?

जीएसटी लागू होने के बाद वस्तुओं एवं सेवाओं पर केवल तीन तरह के टैक्स वसूले जाएंगे। पहला सीजीएसटी, यानी सेंट्रल जीएसटी, जो केंद्र सरकार वसूलेगी. दूसरा एसजीएसटी, यानी स्टेट जीएसटी, जो राज्य सरकार अपने यहां होने वाले कारोबार पर वसूलेगी. कोई कारोबार अगर दो राज्यों के बीच होगा तो उस पर आईजीएसटी, यानी इंटीग्रेटेड जीएसटी वसूला जाएगा। इसे केंद्र सरकार वसूल करेगी और उसे दोनों राज्यों में समान अनुपात में बांट दिया जाएगा।

जीएसटी से आप पर कैसे पड़ेगा असर?

आज एक ही चीज अलग-अलग राज्य में अलग-अलग दाम पर बिकती है। इसकी वजह है कि अलग-अलग राज्यों में उसपर लगने वाले टैक्सों की संख्या और दर अलग-अलग होती है। अब ये नहीं होगा। हर चीज पर जहां उसका निर्माण हो रहा है, वहीं जीएसटी वसूल लिया जाएगा और उसके बाद उसके लिए आगे कोई चुंगी पर, बिक्री पर या अन्य कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। इससे पूरे देश में वो चीज एक ही दाम पर मिलेगी। कई राज्यों में टैक्स की दर बहुत ज्यादा है. ऐसे राज्यों में वो चीजें सस्ती होंगी।

क्या पेट्रोल और शराब पर भी लागू होगा फैसला?

पेट्रोल-डीजल की कीमतें आज अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हैं। यही हाल शराब का है। जीएसटी लागू होने के बाद भी फिलहाल ऐसा जारी रहेगा। क्योंकि राज्यों की डिमांड पर केंद्र सरकार शराब को जीएसटी से बाहर रखने पर राजी हो गई है जबकि पेट्रो पदार्थों पर उसने निर्णय लिया है कि ये रहेंगे तो जीएसटी के अंदर लेकिन इनपर राज्य पहले की तरह ही टैक्स वसूलते रहेंगे। यानी पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में राज्यों में जो फ़र्क़ देखने को मिलता है वो मिलता रहेगा।

जीएसटी से देश को क्या फायदा होगा?

जीएसटी लागू होने के बाद देश की जीडीपी ग्रोथ में तकरीबन दो फीसदी तक का उछाल आने का अनुमान है। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि टैक्स की चोरी रुकेगी क्योंकि अभी टैक्स कई स्तरों पर वसूला जाता है, इससे हेराफेरी की, धांधली की गुजाइश ज्यादा रहती है। जीएसटी के चलते टैक्स जमा करना जब आसान होगा तो ज्यादा से ज्यादा कारोबारी टैक्स भरने में रुचि दिखाएंगे। इससे सरकार की आय बढ़ेगी. व्यापारियों को भी जब अलग-अलग टैक्सों के झंझट से मुक्ति मिलेगी तो वे भी अपना व्यापार सही से कर पाएंगे। टैक्स को लेकर विवाद भी कम होंगे. अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

जीएसटी की दर कौन तय करेगा?

जीएसटी संबंधित फैसले लेने के लिए संवैधानिक संस्था जीएसटी काउंसिल का गठन किया जाएगा. जीएसटी काउंसिल में केंद्र व राज्य दोनों के प्रतिनिधि होंगे। इसके मुखिया केंद्रीय वित्त मंत्री होंगे जबकि राज्यों के वित्त मंत्री सदस्य होंगे. जीएसटी काउंसिल जीएसटी की दर, टैक्स में छूट, टैक्स विवाद, टैक्स दायरे व अन्य व्यवस्थाओं पर सिफारिशें देगी।

जीएसटी इतना फायदेमंद तो अब तक क्यों अटका हुआ था?

जीएसटी को लेकर राज्य सरकारें नुकसान की भरपाई पर अड़ी थीं और तमाम कोशिशों के बावजूद इसका कोई सर्वमान्य फॉर्मूला नहीं निकाला जा सका। अब सरकार ने राज्यों को नुकसान भरपाई का जो फॉर्मूला सुझाया है उसपर राज्यों ने सहमति दी है।