''सरकार सभी पक्षों से बात करने को तैयार, लेकिन झुकेगी नहीं''

नई दिल्ली (7 सितंबर): जम्मू-कश्मीर में बिगड़े हालात को सुधारने के लिए सर्वदलीय बैठक में सभी पार्टियों की राय थी कि देश की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं इस मामले से जुड़े सभी पक्षों से बातचीत जारी रहेगी।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अगुआई में यह बैठक तीन घंटे तक चली। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सभी दलों की ओर से जारी बयान को मीडिया के सामने पढ़ा।

इसमें ये बातें सामने आईं... - प्रतिनिधिमंडल ने घाटी में जारी हालात पर चिंता जाहिर की। - सभी दलों के नेताओं ने माना कि सभ्य समाज में हिंसा की कोई जगह नहीं है। - नेता एक बार एक राय थे कि देश की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। - सदस्यों ने अपील की कि घाटी के लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर बातचीत के लिए सामने आएं। - सदस्यों ने राज्य सरकार और केंद्र से कहा कि सभी पक्षकारों से बातचीत की जाए। - घाटी में शिक्षण संथानों, सरकारी कार्यालयों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों जल्द ही सामान्य तरीके से काम करने लगें। - घायलों के इलाज की पूरी व्यवस्था हो, चाहें वे आम नागरिक हों या सुरक्षा बलों के जवान।

- पैलेट गन पर रोक लगाई जाए। - कुछ इलाकों से afspa हटाया जाए। - पुलिस और सुरक्षाबलों के खिलाफ शिकायत की जांच होनी चाहिए। - अगर शाम को 6 बजे के बाद मार्किट और स्कूल खुलें हो उन्हें इजाजत मिले। - लेफ्ट ने सुझाव दिया कि पाक से बात होनी चाहिए। - राज्य सरकार के काम-काम पर भी सवाल उठे, लेकिन सभी ने कहा कि अभी हालात ऐसे नहीं हैं कि राज्य सरकार पर दोषार्पण किया जाए। - प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्ती होनी चाहिए। - मदरसों और मस्जिदों से जो भारत विरोधी और आजादी के नारे लग रहे हैं उनपर रोक लगनी चाहिए। - कश्मीर में हड़ताल को लेकर जो अलगाववादी नेता कलैंडर निकालते हैं उसपर रोक लगे।

सरकार ने साफ किया... - हिंसा की कोई जगह नहीं। - समस्या का समाधान हिंसा से नहीं बल्कि बातचीत से हो सकता है। - संविधान के दायरे में सभी से बात को तैयार। - सभी से शांति की अपील की जाएगी। - देश की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं।