हुर्रियत नेताओं ने बातचीत से मना किया, 'ऑल पार्टी डेलिगेशन' के नेताओं ने जताया अफसोस

नई दिल्ली (4 सितंबर): जम्मू कश्मीर के दौरे पर गए ऑल पार्टी डेलिगेशन ने पहले दिन कई राजनैतिक दलों के करीब 30 डेलिगेशन्स के 200 सदस्यों से मुलाकात की। जिन्होंने राज्य में हुई हिंसा से आम लोगों को पहुंची चोटों और नुकसान के लिए अफसोस जताया।

कांग्रेस की तरफ से गए गुलाम नबी आजाद ने हुर्रियत नेताओं की तरफ से मिलने से मना करने पर चिंता जताते हुए कहा, कि "हमने कहा था कि अगर कोई भी हमसे मिलने आता है तो हम उनका स्वागत करेंगे और उन्हें सुनेंगे। हम किसी से भी मिलने से मना नहीं करेंगे। राज्य की मुख्यमंत्री की तरफ से उन्हें न्यौता भी दिया गया, लेकिन कोई भी नहीं आया। उन्होंने कहा हमें खुशी होती, अगर वे आते।"

- इसके अलावा सीताराम येचुरी ने कहा, "हमने हुर्रियत नेताओं से मिलने का फैसला किया था। लेकिन उन्होंने सांसदों से सीधे बातचीत से मना कर दिया।"

- येचुरी ने कहा, "हम यासिन मलिक से मिले, एसएएस गिलानी के पास गए, जिन्होंने आखिरी वक्त में ना मिलने का फैसला कर लिया।'

- उन्होने कहा, "हम मीरवाज, शबीर शाह, अब्दुल घानी भट्ट से भी मिले और बातचीत की। सभी ने इस मुद्दे पर बात करने से मना कर दिया।"

- गुलाम नबी ने कहा कि कुछ नेताओं ने अलगाववादी नेता अपनी क्षमता में मुलाकात करने के लिए भी गए। इसका खुलासा ऑल पार्टी मीटिंग में नहीं किया गया था। 

- एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, "मीरवाइज़ काफी परेशान थे। उन्होंने कहा कि वह मौजूदा हालात पर बातचीत नहीं कर सकते। क्योंकि उनके ऑर्गेनाइजेशन ने किसी भी सांसद से बात करने से मना किया है।"