PAK पर बड़ा वार, बलूची भाषा में बुलेटिन ब्रॉडकास्ट करेगा AIR, बलूचियों तक पहुंचेगी भारत के #ManKiBaat

नई दिल्ली (31 अगस्त): अब बलूचिस्तान में सुनाई देगी भारत के मन की बात, मोदी सरकार के आदेशानुसार ऑल इंडिया रेडियो जल्‍द ही बलूची भाषा में बुलेटिन शुरू करने जा रहा है। यह बुलेटिन बलूचिस्‍तान में रह रहे लोगों को ध्‍यान में रखकर शुरू किया जा रहा है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, बुधवार को कैबिनेट मीटिंग में बलूच भाषा में प्रोग्राम शुरू करने के फैसले को मंजूरी दी गई। इस बुलेटिन का प्रसारण रेडियो कश्‍मीर जम्‍मू स्‍टेशन से किया जाएगा। यह बुलेटिन जम्‍मू के 300केवी डीआरएम से प्रसारित किया जाएगा, जिसका दायरा 300 किमी होगा। यह प्रसारण पीओके, गिलगित समेत लाहौर तक सुनाई देगा। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्रचीर से पीओके और बलुचिस्तान का जिक्र किया था। उसके बाद से बलूचिस्तान, पीओके समेत गिलगित-बल्तिस्तान और सिंध में भी आजादी की मांग ने जोर पकड़ लिया है।

अकबर बुगती के पोते ब्रहुमदाग बुगती ने पीएम मोदी का किया शुक्रिया- 'बलूच रिपब्लिकन पार्टी' के अध्यक्ष एवं बलूच राष्ट्रवादी नेता नवाब अकबर खान बुगती के पोते ब्रहुमदाग बुगती ने मोदी को बलूच लोगों के साथ हो रहे अत्याचार के मुद्दे को उठाने के लिए तहे दिल से शुक्रिया अदा किया। ब्रहमदग बुगती का कहना है कि भारत एक जिम्‍मेदार पड़ोसी की भूमिका निभाते हुए बलूचिस्‍तान में दखल दें और नरसंहार रुकवाए। बता दें कि 25 अगस्त को बलूचिस्तान की आजादी के सपोर्टर्स ने वहां अपने शहीद लीडर अकबर बुगती के साथ नरेंद्र मोदी की फोटो लहराई थी।

बलूचिस्तान पर पीएम मोदी ने लाल किले से कहा था...

- 15 अगस्त को अपनी स्पीच में मोदी ने पहली बार लाल किले से बलूचिस्तान का जिक्र किया था। - उन्होंने कहा, पिछले कुछ दिनों में बलूचिस्तान और पाक के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों ने जिस तरह से मुझे बहुत-बहुत धन्यवाद दिया है। - इस पर मैं उनका तहे दिल से उनका शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। - इससे पहले पीएम ने कश्मीर मसले पर ऑल पार्टी मीटिंग में कहा था, पीओके भी भारत का हिस्सा है।  - गिलगित-बाल्तिस्तान और बलूचिस्तान में पाकिस्तान जो हिंसा कर रहा है, उसके बारे में भी बात होनी चाहिए।

खंड-खंड होने की कगार पर पहुंचा पाक...

बलूचिस्तान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन के बाद दुनियाभर में बलूचिस्तान का मुद्दा जोर पकड़ने लगा है। अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, फ्रांस और अब ब्रिटेन बलूचिस्तान की आजादी का आंदोलन चरम पर है। बलूचिस्तान को लेकर जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। जिसमें 'पीएम मोदी फॉर बलूचिस्तान' और 'कदम बढ़ाओ मोदी जी हम तुम्हारे साथ हैं' जैसे नारे लगाए गए।

लंदन की सड़कों लगे PAK विरोधी नारे... लंदन स्थित चीनी दूतावास के बाहर पाक-चीन इकनॉमिक कॉरिडोर के खिलाफ बलूच और सिंधी नेताओं ने प्रदर्शन किया। बलूचिस्तान की आजादी के बाद पीओके, गिलगित-बल्तिस्तान और सिंध में भी आजादी की मांग ने जोर पकड़ लिया है। लंदन में हुए प्रदर्शन में बलूचिस्तान की आजादी की मांग के साथ-साथ 'सिंधुदेश' की आजादी की मांग भी उठनी शुरू हो गई है। 

जर्मनी की सड़कों लगे PAK विरोधी नारे... जर्मनी के अलग-अलग शहरों में बलूचिस्तान की आजादी मांग को लेकर बलूच लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। जर्मनी के म्यूनिख में बलूच लोगों ने पीएम मोदी बलूचिस्तान लव्स यू की तस्वीरें हाथ में लेकर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए। तीन दिन पहले भी जर्मनी में पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी हुई थी। इस रैली की खास बात यह थी कि कार्यकर्ता अपने हाथों में भारतीय तिरंगा पकड़कर लहरा रहे थे।

बलूचिस्तान-अफगान सीमा पर जला पाक झंडा... पीएम मोदी ने बलूचिस्तान के समर्थन में बातें क्या कही बलूचिस्तान सहित अफगानिस्तान सीमा से सटे इलाकाई क्षत्रों में लोगों में गजब का उत्साह है। लोग वहीं गुटों में बैठक कर पाकिस्तान के विरोध व भारत के समर्थन में नारे लगा रहे हैं। इन हालातों से पाकिस्तान की मुश्किलें सहज देखीं जा रहीं हैं। पाकिस्तान ने झंडा जलाए जाने व भारत के पक्ष में नारेबाजी लगाए जाने से भड़क गया है। अफगान-बलूचिस्तान सीमा पर लगते एक गेट को बंद कर दिया है।

पाकिस्तान से आजादी की जंग लड़ रहा है बलूचिस्तान...

- बलूचिस्तान ईरान और पाकिस्तान के बीच का हिस्सा है।  - बलूचिस्तान पूरे पाकिस्तानी प्रांत का 44 फिसदी हिस्सा है। - पर यहां पाक की कुल आबादी के मात्र 5 फिसदी लोग रहते हैं। - 19 करोड़ पाक आबादी में से 1.3 करोड़ लोग ही यहां रहते हैं। - पाकिस्तान में 7 करोड़ मतदाताओं में से सिर्फ 40 लाख वोटर बलूचिस्तान में हैं। - नेशनल एसेंबली की 342 सीटों में बलूचिस्तान से सिर्फ 17 सीटें बलूचिस्तान में हैं। - जिनमें से 14 सामान्य हैं और तीन महिलाओं के लिए सुरक्षित हैं। - बलोच, बलूचिस्तान प्रान्त में रहने वाले मुख्य लोग है।  - इनकी भाषा भी बलोच है जो ईरानी भाषा से मिलती जुलती है। - इसमें प्राचीन अवस्ताई भाषा की झलक मिलती है  - जो वैदिक संस्कृत की बड़ी करीबी भाषा मानी जाती है। - बलोच लोग कबीलों में पहाड़ी और रेगिस्तानी क्षेत्रों में रहते हैं। - बलूचिस्तान में खनिज और गैस प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। - इसी पर कब्जे को लेकर पाकिस्तानी सेना वहां जुर्म ढहा रही है। - 1948, 1958-59, 1962-63 और 1973-77 में यहां सैन्य अभियान चलाए। - कब्जे के बावजूद यह सूबा है पूरी तरह से कभी पाक हुकूमत के कब्जे में नहीं रहा। - बलूचिस्तान में पाकिस्तान सरकार की नहीं कबीलाई सरदारों की चलती है।  - धूल भरी आंधी, रेतीला इलाका, बंजर जमीन और कबीले ये बलूचिस्तान की असली तस्वीर है।  - इन कबीलों का अपना कानून है, इसमें हाथ के बदले हाथ और सिर के बदले सिर लेने की परंपरा है।  - आजादी की मांग तो 1948 से ही उठाई जा रही है, लेकिन 2000 के बाद से आग और भड़क गई। - यही वजह है कि कई बलूच नेताओं को दूसरे देशों में शरण लेनी पड़ रही है।