INSIDE STORY: यादव परिवार में 'महाभारत', जानिए क्यों छिड़ी है चाचा-भतीजे में आर-पार की लड़ाई...

डॉ. संदीप कोहली,​

नई दिल्ली (24 अक्टूबर) : समाजवादी पार्टी में जारी चाचा-भतीजे की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है। आज स्थिती यहां तक पहुंच गई कि परिवार के मुखिया मुलायम सिंह यादव के सामने दोनों आपस में ही भिड़ पड़े। सोमवार को पार्टी मुख्यालय में हुई बैठक में पहले अखिलेश ने चाचा शिवपाल को खरी-खरी सुनाई तो उसके बाद चाचा शिवपाल ने अखिलेश पर ही उल्टे वार करते हुए उन्हें अनुशासनहीन बता दिया। सीएम अखिलेश ने अपने भाषण में कहा कि कुछ लोग परिवार में मतभेद पैदा कर रहे, पार्टी को साजिश से बचाना मेरी जिम्मेदारी है। वहीं पार्टी अध्यक्ष शिवपाल यादव में कहा पार्टी में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी, नेताजी के इस पार्टी खून-पसीने से सींचा है, नारेबाजी करने से सरकार नहीं बनेगी। अगर कहा जाए कि पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव शायद अपने अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं तो गलत नहीं होगा, क्योंकि एक पार्टी में बगावत है तो दूसरी तरफ परिवार में जबरदस्त तनाव। मुलायम सिंह के लिए मुसीबत यह है कि एक तरफ बेटा खड़ा है तो दूसरी तरफ भाई। दोनों में से एक को चुनना है। हालांकि बैठक के अंत में अपने संबोधन में मुलायम ने भाई का पक्ष लिया और बेटे को कई बार फटकार लगाई। मुलायम सिंह ने अखिलेश को कहा कि शिवपाल तुम्‍हारे चाचा हैं और उनके गले लगो। लेकिन गले मिलने के ठीक बाद ही चाचा-भतीजे के बीच फिर नोक-झोंक हो गई। वहीं पार्टी ऑफिस के बाहर कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ गए। आखिरकार पार्टी और परिवार में बगावत अपने चरम पर कैसे पहुंच गई? क्यों चाचा-भतीजा आमने-सामने खड़े हैं? हम आपको पूरे विस्तार से बताते हैं-

जानिए कब-कब और किन-किन मुद्दों पर चाचा-भतीजे के बीच हुई तकरार...

झगड़े की शुरूआत हुई था 2012 में... - वैसे चाचा-भतीजे के बीच जंग की शुरूआत नई नहीं है, शुरूआत तो 2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ही हो गई थी। - जब अखिलेश यादव ने पश्चिमी यूपी के बड़े माफिया डीपी यादव को सपा में शामिल करने का खुले तौर पर विरोध किया था।  - अखिलेश के विरोध की वजह से डीपी यादव की सपा में एंट्री नहीं हो सकी थी, चाचा शिवपाल चाहते थे कि डीपी यादव की पार्टी में एंट्री हो।

नवंबर 2015 में पंचायत अध्यक्ष चुनावों को लेकर हुए आमने-सामने... - पिछले साल नवंबर में जब पंचायत अध्यक्षों के चुनाव में पार्टी के अंदर टिकट बंटवारे को लेकर भी दोनों आमने-सामने आ गए थे। - तब शिवपाल यादव ने टिकट बंटवारे को लेकर अखिलेश के करीबी सुनील यादव और आनंद भदौरिया को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।  - इसके विरोध में अखिलेश यादव ने सैफई महोत्सव का बहिष्कार कर दिया, मजबूरन दोनों युवा नेताओं को पार्टी में फिर से वापस लेना पड़ा था।

बेनी प्रसाद वर्मा और अमर सिंह को लेकर भी हुआ झगड़ा... - इसके बाद मई में बेनी प्रसाद वर्मा को पार्टी में शामिल करने पर अखिलेश असहमत थे, इसमें भी शिवपाल की मुख्य भूमिका थी। - अमर सिंह को भी पार्टी में दोबारा वापस लाने को लेकर आजम और रामगोपाल के खुला विरोध कर रहे थे। - इसके चलते अखिलेश असमंजस में थे, लेकिन शिवपाल पूरी तरह से अमर सिंह के साथ खड़े थे।

अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की पार्टियों के विलय को लेकर आमने-सामने... - अतीक अहमद के पार्टी में शामिल होने पर अखिलेश ने कड़ी आपत्ति जताई थी, शिवपाल ने अतीक का साथ दिया था।  - शिवपाल यादव को एक और बड़ा झटका तब लगा जब उनकी पहल पर मुख्तार अंसारी की पार्टी का विलय सपा में होने से रोक दिया गया। - 21 जून को कौमी एकता दल का सपा में विलय हो गया लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के विरोध के कारण 25 जून को ही विलय रद्द कर दिया गया। - कौमी एकता दल के विलय को लेकर और मुख्तार अंसारी की एंट्री से अखिलेश नाराज थे, विलय कराने के लिए शिवपाल पूरी कोशिश कर रहे थे।  - मध्यस्थता करने वाले मंत्री से नाराजगी जाहिर करते हुये अखिलेश ने मंत्रि‍मंडल से बलराम यादव को निष्कासित किया था।  - विलय रद्द होने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार में शिवपाल के कहने पर दोबारा बलराम यादव को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया।

शिवपाल ने सार्वजनिक मंचों से दी इस्तीफे की धमकी... - इसके कुछ दिन बाद नाराज शिवपाल ने सार्वजनिक मंचों से एक से ज्यादा बार इस्तीफे देने की धमकी दी थी।  - शिवपाल यादव ने 14 अगस्त को मैनपुरी में एक कार्यक्रम के दौरान बेहद भावुक अंदाज में कहा कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे हैं।

मुलायम ने बेटे की जगह भाई का दिया साथ... - इसके बाद सपा प्रमुख मुलायम सिंह को बीच में आना पड़ा था, उन्होंने सार्वजनिक रूप से अखिलेश को फटकार लगाई। - मुलायम ने कहा था कि शिवपाल पहले भी इस्तीफा दे चुके हैं और उन्होंने बमुश्किल उन्हें मनाया था।  - उन्होंने कहा था कि अगर शिवपाल पार्टी से चले गए तो सरकार और पार्टी के लिए मुश्किल हो जाएगी।

मुख्य सचिव को लेकर दोनों में टकराव... - अखिलेश के चहेते मुख्य सचिव आलोक रंजन के रिटायरमेंट के बाद दीपक सिंघल को मुख्य सचिव बनाए जाने में शिवपाल का हाथ था। - दीपक सिंघल पिछले चार सालों से शिवपाल के सिंचाई विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर कार्यरत थे। - अखिलेश इसके पक्ष में नहीं थे, वो सिंघल की जगह प्रवीर कुमार को मुख्य सचिव बनाना चाहते थे।

शिवपाल के करीबी मंत्रियों को अखिलेश ने किया बर्खास्त... - 12 सितम्बर को अखिलेश ने भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अपने दो कैबिनेट मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया। - दोनों कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति और राजकिशोर सिंह शिवपाल के करीबी माने जाते हैं। - हालांकि 26 सितंबर को अखिलेश सरकार में फिर से मंत्री बन गए थे गायत्री प्रजापति।

शिवपाल ने मुलायम को फोन कर कहा, अखिलेश के साथ काम करना मुश्किल... - 14 सितंबर अखिलेश ने शिवपाल के करीबी और सरकार के चीफ सेक्रेटरी दीपक सिंघल को भी बिना कोई कारण बताए अचानक पद से हटा दिया था। - इससे पहले 12 सितंबर को जब दो मंत्रियों को करप्शन के आरोपों को लेकर बर्खास्त किया गया तो इसमें भी शिवपाल से सलाह नहीं ली गई। - बताया जाता है कि इन घटनाक्रमों से नाराज शिवपाल ने इस बारे में मुलायम से फोन पर बात कर अपनी नाराजगी जाहिर की।  - शिवपाल ने मुलायम से कहा कि इस तरह अब अखिलेश के साथ काम करना मुश्किल है। - मुलायम ने बेटे अखिलेश की जगह अपने भाई शिवपाल को सपा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। - अखिलेश ने महज दो घंटे के अंदर मंत्रिमंडल में शिवपाल के पर कतरते हुए अहम विभाग छीन लिए।  - शिवपाल के पास राजस्व, सिंचाई और पीडब्ल्यूडी जैसे अहम विभाग थे।

शिवपाल सरकार और रामगोपाल सपा से बर्खास्त...  - 23 अक्टूबर को सपा में सवा महीने से चल रहे घमासान में नया मोड़ आ गया। - सीएम अखिलेश यादव ने विधायकों की बैठक में अमर सिंह पर निशाना साधा।  - साथ ही चाचा व पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव समेत चार मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया। - सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव, पर्यटन मंत्री प्रकाश सिंह, महिला कल्याण मंत्री शादाब फातिमा। - और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री नारद राय को अखिलेश ने सरकार से बर्खास्त कर दिया। - इसके जवाब में चंद घंटों बाद ही शिवपाल ने राम गोपाल यादव को पार्टी से निकाल दिया। - शिवपाल ने सपा प्रमुख मुलायम सिंह की अनुमति से पार्टी से छह साल के लिए निकाल दिया।  - मुख्यमंत्री आवास पर आधे घंटे तक चली बैठक में 230 में से 183 विधायक शामिल हुए थे।

पार्टी मुख्यालय बैठक में क्या हुआ

शिवपाल यादव ने बैठक में क्या कहा... - मुझे पार्टी चलाने की छूट मिले, पार्टी में सिर्फ अनुशासन के साथ रहें। - शिवपाल यादव ने मुलायम सिंह यादव को CM बनाने की मांग की। - मैंने अमर सिंह से कभी संबंध नहीं तोड़ा, अमर सिंह की पैरों की धूल नहीं हो। - अमर सिंह का बचाव करते हुए शिवपाल यादव ने कहा, 2003 में उनकी मदद से पार्टी सत्ता में आई थी। - लुटेरों, दलालों से जनता को नफरत है, इनसे वोट नहीं मिलेंगे। - यह नेताजी के खून-पसीने से बनी पार्टी है, नारेबाजी करने से सरकार नहीं बनेगी। - तभी पार्टी 2017 में चुनाव जीत पाएगी। - नेताजी की पार्टी में वही रहेगा जो ईमानदारी से काम करेगा, दलाली नहीं करेगा, अवैध काम नहीं करेगा। - मैं अपने बेटे और गंगा जल की कसम खाकर कहता हूं कि अखिलेश ने कहा था कि वह दल बनाएंगे। - जब मैं CM अखिलेश से मिलने गया था, मुझसे उन्होंने कहा था कि मैं दल बनाऊंगा। - मैंने मुख्यमंत्री और नेताजी दोनों की हर बातें मानीं। - मुझे हटा दिया गया, को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, मैंने एयरपोर्ट जाकर उनका स्वागत किया। - नेताजी मेरा क्या दोष था कि मेरा मंत्रालय मुझसे छीन लिया गया, मेरे मंत्रालय के कामकाज की समीक्षा होती थी। - शिवपाल यादव ने पूछा, 'क्या हमारे मंत्रालय में अच्छा काम नहीं हुआ, क्या मेरा कोई योगदान नहीं है। - अनुशासनहीनता पार्टी में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह पार्टी नेताजी की वजह इस ऊंचाई पर पहुंची है।

अखिलेश यादव ने बैठक में क्या कहा... - नेताजी आपके खिलाफ साजिश होगी, तो मैं बोलूंगा। - अमर सिंह ने कहा कि अखिलेश नहीं रहेगा सीएम, अमर सिंह के बयान से आहत हुआ हूं। - चाचा (शिवपाल यादव) ने मेरे खिलाफ आपसे क्या-क्या कहा मुझे सब पता है। - मैं भी बर्बाद हो जाउंगा, मैं कहां जाउंगा। - अगर यह आपकी पार्टी और आपका करियर है तो मेरा भी करियर हैं। - मुझे कहते, तो इस्तीफा दे देता, मैंने पूरे समय जनता के लिए काम किया। - नेताजी (मुलायम सिंह यादव) आप चाहें तो मुझे पार्टी से निकाल सकते हैं। - नेताजी के कहने पर प्रजापति को वापस लिया। - नेताजी, आपके कहने पर दीपक सिंघल को हटाया। - नेताजी आपके दिए काम को मैंने समय पर पूरा किया है। - पार्टी को साजिश से बचाना मेरी जिम्मेदारी। - चुनाव में टिकट मैं ही बांटूंगा। - मैं पार्टी के खिलाफ कोई साजिश नहीं बर्दाश्त करूंगा। - लोग परिवार में मतभेद पैदा कर रहे हैं, मेरे पिता, मेरे लिए गुरु समान। - यह सौ प्रतिशत नेताजी की पार्टी है, मैं कुछ भी नहीं हूं। - लोग कह रहे हैं कि कि नई पार्टी बनाई जाएगी, कौन नई पार्टी बना रहा है? मैं नहीं बना रहा। - मुझे मुलायम सिंह यादव और शिवपाल के सामने अपनी बात रखने का समय चाहिए।