उ.प्र. में उठापठकः अखिलेश ने चाचा के करीबी शुक्ला दंपति को किया बर्खास्त !

नई दिल्ली (28 दिसंबर): उत्तरप्रदेश की सियासत में रुक-रुक कर सुनामी आ रही हैं। एक बार अखिलेश की सुनामी आती हो तो शिवपाल के किले ढह जाते हैं तो दूसरी बार शिवपाल की सुनामी आती और वो अखिलेश मोर्चों को अपने साथ बहाकर ले जाती है। ऐसी ही जवाबी सुनामी बुधवार की शाम देखने को मिली। समाजवादी पार्टी के लगभग सवा तीन सौ प्रत्याशियों की लिस्ट जारी होते ही ऐसी सुनामी आयी कि अखिलेश और उनसे जुड़े विधायकों के सपनों की दुनिया ही उजड गयी। जवाब में अखिलेश ने भी एक छोटी सुनामी से जवाब दिया और चाचा शिवपाल के करीबी सुरभि शुक्ला और संदीप शुक्ला तिनके जैसे बह गये।

 अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री होने का अहसास कराया और आवास विकास परिषद् की उपाध्यक्ष सुरभि शुक्ला और उनके पति डॉक्‍टर संदीप शुक्ला को बर्खास्‍त कर दिया है। संदीप शुक्‍ला यूपी राजकीय निर्माण निगम (यूपीआरएनएन) में सलाहकार थे। सुरभि शुक्‍ला और संदीप शुक्‍ला को राज्‍यमंत्री का दर्जा हासिल था और उनसे यह दर्जा भी वापस ले लिया गया है। मुलायम सिंह यादव ने बुधवार को जिन उम्‍मीदवारों के नामों का ऐलान किया था, उनमें संदीप शुक्ला भी थे। उन्‍हें सुल्तानपुर के सदर से टिकट दिया गया है। सुरभि और संदीप को अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव का बेहद करीबी बताया जाता है। माना जा रहा है कि उम्‍मीदवारों के चयन में चाचा शिवपाल का पलड़ा भारी होने के बाद अखिलेश ने नाराज होकर यह कदम उठाया है।

अखिलेश गुरुवार को उन सभी विधायकों और मंत्रियों से मुलाकात करेंगे जिनका टिकट कट गया है। बता दें कि इस लिस्‍ट में 48 विधायकों के टिकट काट दिए गए हैं। इनमें ज्यादातर अखिलेश के करीबी विधायक हैं। इनमें वे विधायक भी हैं जिन्हें अखिलेश अपने आवास पर बुलाकर विचार-विमर्श करते रहे हैं। इन विधायकों की सीट पर शिवपाल यादव के करीबी लोगों को टिकट दिया गया है।

जिन विधायकों का टिकट कटा है उनमें मेहनगर से विधायक बृजलाल सोनकर भी हैं। टिकट कटने के बाद उन्‍होंने अखिलेश यादव से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद उन्‍होंने कहा, 'हम समाजवादी हैं, अवसरवादी नहीं। हमारे यहां कोई बागी नहीं होता।'