अजमेर दरगाह ब्लास्ट मामले में फ़ैसला 8 मार्च तक टला

नई दिल्ली(25 फरवरी): 11 अक्टूबर 2007 में अजमेर दरगाह में हुए ब्लास्ट मामले में एनआईए कोर्ट द्वारा आज फ़ैसला सुनाया जाना था। सभी आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट भी लाया गया लेकिन कोर्ट ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए फ़ैसला टाल दिया। अब कोर्ट अपना फ़ैसला 8 मार्च 2017 को सुनाएगी।

 - अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में हुए बम ब्लास्ट की घटना में 3 लोगों की जान गई थी और 15 लोग जख्मी हुए थे, जिसका फैसला आज जिला एवं सेशन न्यायालय जयपुर द्वारा सुनाया जाना था।

-  फ़ैसले को मध्यनज़र रखते हुए स्वामी असीमानंद सहित सभी आरोपियों को कड़े सुरक्षाबंदोबस्त के साथ कोर्ट लाया गया था। जब सभी आरोपियों को जज के सामने पेश किया गया तब फ़ैसला तैयार नहीं होने की बात कह इस संवेदनशील मामले का फ़ैसला टाल दिया।

- अगले माह की 8 तारीख के लिए सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले भी कोर्ट ने 6 फरवरी को फ़ैसला सुनाये जाने के लिए आज का दिन मुकरर किया था

- आज खास बात ये भी रही कि आज फ़ैसले का दिन तय होने के बावजूद सरकारी वकील अश्विनी कुमार गैर हाजिर थे।

क्या है पूरा मामला :

अब तक मामले की सुनवाई में करीब 9 साल 4 माह और 6 दिन का समय लगा। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से करीब 149 गवाह पेश किए गए, जिसमें से करीब 26 महत्वपूर्ण गवाह पक्षद्रोही हो गए।

सबसे पहले राजस्थान एटीएस ने जांच शुरू की। एटीएस ने पूरे मामले में तीन आरोपी देवेन्द्र गुप्ता, लोकेश शर्मा और चन्द्रशेखर लेवे को साल 2010 में गिरफ्तार कर लिया। वहीं 20 अक्टूबर 2010 को मामले से जुड़ी पहली चार्जशीट भी कोर्ट में पेश कर दी गई,लेकिन इसके बाद अप्रैल 2011 में गृह विभाग द्वारा एक नोटिफिकेशन जारी करके मामले की जांच एनआईए को सौंप दी गई।

एनआईए ने मामले में जांच आगे बढ़ाई और हर्षद सोलंकी, मुकेश बसानी, भरतमोहनलाल रतेश्वर, स्वामी असीमानंद, भावेश अरविन्द भाई पटले और मफत उर्फ मेहूल को गिरफ्तार किया। वहीं मामले में तीन चार्जशीट और पेश की।

पूरे मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से 442 दस्तावेजी साक्ष्य पेश करते हुए 149 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए, जिसमें से 26 गवाह पक्षद्रोही हो गए। वहीं बचाव पक्ष की तरफ से 38 दस्तावेजी साक्ष्य पेश करते हुए 2 गवाह पेश किए गए। अभियोजन पक्ष भी मानता है कि जो गवाह पक्षद्रोही साबित हुए हैं। वे काफी महत्वपूर्ण हैं। वहीं बचाव पक्ष ने मामले में कई आरोपियों को झूठा फंसाने की बात भी कही है।

भावेश की तरफ से पैरवी करने वाले अधिवक्ता लोकेश शर्मा ने कहा कि हमने कोर्ट में कई ऐसे साक्ष्य पेश किए हैं, जिससे यह साबित होता है कि मेरे क्लाइंट को झूठा फंसाया गया है। मामले में कोर्ट ने लम्बी सुनवाई की है। ऐसे में अब सबकी नजरें कोर्ट पर टिकी हुई थी।