यूपी में इस तरह से अमित शाह का प्लान ध्‍वस्त करेंगे मुलायम

नई दिल्ली (30 मई): यूपी में चुनाव अभी एक साल बाद हैं, लेकिन राजनीति के बड़े दिग्गज अभी से करवट बदलने लगे हैं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव और राष्ट्रीय लोक दल के मुखिया अजित सिंह एकसाथ आते दिख रहे हैं। दोनों की नजदीकियां चुनाव पूर्व होने वाले संभावित गठबंधन के रूप में देखी जा रही है।

ऐसे कयास लगने शुरू हो गए हैं कि समाजवादी पार्टी राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर चुके उम्मीदवारों में से किसी एक का नाम वापस लेगी और उसकी जगह अजित सिंह का नाम आगे करेगी। इस बीच, अजित के बेटे जयंत चौधरी को विधान परिषद भेजे जाने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक जयंत कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से इस संबंध में मुलाकात भी कर चुके हैं।

विश्लेषक मानते हैं कि पश्चिमी यूपी में वोटों के ध्रुवीकरण की बीजेपी की कोशिश से चौकस हुए मुलायम ने अजित से गठबंधन का फैसला कर लिया है। दोनों ही दलों के प्रवक्ताओं ने इसे औपचारिक मुलाकात बताया है। वहीं, यूपी में कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर राज्य में कांग्रेस को जिंदा करने में जुटे हुए हैं। इस कोशिश में प्रियंका वाड्रा को बतौर मुख्यमंत्री उम्मीदवार उतारा जा सकता है। मायावती, 2014 के चुनाव के बाद से राजनीति से बाहर दिखाई दे रही हैं उसी ब्राह्मण, दलित, मुस्लिम गठबंधन को फिर जीवित करने की कोशिश में हैं

किसान नेता चौधरी चरण सिंह की जयंती के अवसर पर, समाजवादी पार्टी उनकी विरासत को भुनाने की तैयारी में भी है। पार्टी अजित की आरएलडी को जबरन विलय के लिए तैयार कर सकती है लेकिन अजित ने ‘बाहरी प्रबंधन’ का सुझाव दिया है। वहीं, मुख्यमंत्री अखिलेश और महासचिव राम गोपाल यादव अजित के साथ किसी भी तरह के गठबंधन के पक्ष में नहीं हैं लेकिन मुलायम और शिवपाल इसके पक्ष में बताए जा रहे हैं।