देश में प्रदूषण का आपातकाल, दिल्ली-पटना में गला घोटती है जहरीली हवा !

नई दिल्ली (20 फरवरी): भारत में हर साल 11 लाख लोगों की मौत होती है और इसका कारण चौकाने वाला है। ये मौते किसी आतंकवादी हमले या कैंसर जैसी बीमारी से नहीं, बल्कि सिर्फ सांस लेने से हो रही है। ये चौकाने वाली खबर एक ताजा रिपोर्ट में आयी है।

एक नए अध्ययन में कहा गया है कि वायु प्रदूषण से हर मिनट औसतन 2 लोग मारे जाते हैं। मेडिकल मैगजीन 'द लान्सिट' के मुताबिक, वायु प्रदूषण हर साल 10 लाख से ज्यादा भारतीयों की जान लेता है। इतना ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से कुछ शहर भारत में हैं। इतनी भयावह स्थिति के बाद भी भारत वायु प्रदूषण की निगरानी के लिए वार्षिक तौर पर बहुत कम खर्च करता है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अनिल माधव दवे ने हाल ही में संसद में जानकारी दी थी कि भारत इस मद में सालाना महज 7 करोड़ रुपये ही खर्च करता है।

2010 के आंकड़ो पर आधारित इस शोध के नतीजे इसी हफ्ते जारी किए गए। इसमें कहा गया है कि दुनिया भर में समय से पहले प्रसव के 27.34 लाख मामलों को पीएम 2.5 के प्रभाव से जोड़ा जा सकता है। इन मामलों से दक्षिण एशिया बुरी तरह प्रभावित होता है। यहां 16 लाख बच्चों का जन्म प्रसव काल पूरा होने से पहले ही हो जाता है। अध्ययन में कहा गया है कि वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण एक-दूसरे से जुड़े हैं। इनसे एक साथ निपटने की जरूरत है।