दुश्मनों से निपटने के लिए भारत को 36 नहीं 200-250 राफेल फाइटर जेट की जरूरत- अरूप राहा

नई दिल्ली (28 दिसंबर): वायु सेना प्रमुख अरूप राहा 31 दिसंबर को रिटायर हो रहे हैं। रिटायर होने से पहले निवर्तमान वायु सेना प्रमुख ने साफ किया है कि महज 36 राफेल लड़ाकू विमान देश की सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं होंगे, अरुप राहा कि माने तो भारत को अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त के लिए तकरीबन 200 से 250 और लड़ाकू विमानों की जरूरत है।

एयर चीफ मार्शल ने इस बात पर भी अफसोस जताया कि 'फोर्स मल्टीप्लायर' मिड एयर रीफ्यूलर के लिए निविदा वापस लेनी पड़ी थी। उन्होंने कहा कि नई निविदा आमंत्रित करने की तैयारी चल रही है और खरीद को तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी वायु सेना की ताकत लड़ाकू बेड़ा होता है। देश को तेजस के अलावा अन्य प्रोडक्शन लाइन की भी जरूरत है। उन्होंने साफ किया कि सरकार ने 42 स्क्वाड्रन की क्षमता मंजूर की है। उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण की भी आवश्यकता है।

राहा ने कहा कि भारत के पास पर्याप्त भारी-भरकम लड़ाकू-सु 30 एमकेआई-विमान हैं जो अगले 30-40 साल तक चलेंगे। हल्के भार वाले विमानों की पूर्ति वायु सेना ने जिन 123 तेजस लड़ाकू विमानों का ऑर्डर किया है, उससे हो जाएगी। वायु सेना प्रमुख ने कहा कि राफेल शानदार विमान है और यह मध्यम भार वाले विमानों की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि हमने सिर्फ 36 विमानों का आदेश दिया है और हमें इस मध्यम भार श्रेणी में और विमानों की आवश्यकता है ताकि पूरी क्षमता हासिल की जा सके।

भारत और फ्रांस ने 23 सितंबर, 2016 को राफेल विमानों को लेकर डील पर हस्‍ताक्षर किए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पेरिस यात्रा के दौरान वर्ष 2015 में इस समझौते के बावत घोषणा की थी। भारत को वर्ष 2019 से 2022 के बीच यह विमान मिलने की उम्‍मीद है। भारतीय वायुसेना पहले ही यह स्‍वीकार कर चुकी है कि पाकिस्‍तान और चीन को एक साथ जवाब देने के लिए हमारे पास पर्याप्‍त मात्रा में हथियार मौजूद नहीं हैं। आईएएफ को 42 फाइटर स्‍क्‍वाड्रन दिए गए हैं और उनके पास सिर्फ 33 फाइटर स्‍क्‍वाड्रन ही मौजूद हैं। इस दौरान अरुप राहा ने स्‍वीकार करते हुए कहा कि मेरे पूरे करियर की सबसे खराब यादें इसी साल मुझे मिली हैं। उन्‍होंने पठानकोट एयरबेस पर हुआ आतंकी हमला और एन-32 विमान का न मिल पाना। यह मेरी करियर की सबसे खराब यादें हैं।