मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने SC से कहा, दोबारा कुरान लिखने जैसा होगा तीन तलाक को अवैध ठहराना

नई दिल्ली ( 28 मार्च ): ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने तीन तलाक के खिलाफ सभी याचिकाओं को खारिज करने की मांग की है। मुस्लिम बोर्ड ने कहा कि उनके खिलाफ तीन तलाक के मुद्दे पर दाखिल की गई याचिका आधारहीन है। इस मामले में अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी।


मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि अगर तीन तलाक को अमान्य करार दिया जाता है तो यह अल्लाह के निर्देशों का उल्लंघन होगा। इतना ही नहीं, बोर्ड का कहना है कि तीन तलाक को न मानना कुरान को दोबारा लिखने और मुस्लिमों से जबरदस्ती पाप कराने के लिए मजबूर करने जैसा होगा। बोर्ड ने साफ कर दिया कि तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह इस्लाम धर्म का अभिन्न हिस्सा है। इसमें बदलाव संभव नहीं हैं।


मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि मुस्लिमों की धार्मिक रिवायतों पर दायर याचिकाएं निजी पक्ष के खिलाफ मूलभूत अधिकारों को लागू करवाने की कोशिश है। बोर्ड ने कहा कि उसके प्रावधान संविधान की धारा 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) के तहत वैध हैं। बोर्ड ने कहा,'अगर पवित्र कुरान की इसी तरह बुराई की जाती रही तो जल्दी ही इस्लाम खात्मे की कगार पर आ जाएगा। हालांकि तीन तलाक तलाक देने का बिल्कुल अलग तरीका है लेकिन कुरान की पवित्र आयतों और पैगंबर के आदेश के मद्देनजर इसे अवैध करार नहीं दिया जा सकता।


पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि सभी मुस्लिम कुरान और पैगम्बर के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं। पर्सनल लॉ बोर्ड के मुताबिक अगर कोई मुस्लिम कुरान में मना किए गए कामों को अंजाम देता है तो वह गुनाह करता है।


पर्सनल लॉ बोर्ड के मुताबिक,'इस तरह अगर सुप्रीम कोर्ट यह तय करता है तीन तलाक वैध नहीं है तो यह पवित्र कुरान को दोबारा लिखे जाने जैसा होगा। कुरान की आयतें कुछ और नहीं बल्कि अल्लाह के शब्द हैं और यही इस्लाम का आधार हैं। कुरान के किसी भी हिस्से से छेड़छाड़ इस्लाम के मूलभूत तत्वों से छेड़छाड़ करने जैसा होगा।'