लाखों की नौकरी छोड़ खोला फुटपाथ पर स्कूल

 

नई दिल्ली(6 सितंबर): अगर आप अहमदाबाद के वात्वा इलाके में सदभावना पुलिस चौकी के पास से गुजरते हैं तो सड़क किनारे फुटपाथ पर पढ़ रहे बच्चों पर आपकी नजर चली जाएगी। एल. डी. इंजिनियरिंग कॉलेज से इंस्ट्रूमेंटेशन और कंट्रोल इंजिनियरिंग में बी. टेक. विराट शाह अब वात्वा और नारोल इलाकों की झुग्गी झोपड़ियों के बच्चों को पढ़ाकर बेहतर जिंदगी का रास्ता दिखाते हैं। 45 साल के विराट शाह ने इसके लिए दुबई में अपनी नौकरी छोड़ दी। वह 200 बच्चों को मुफ्त में पढ़ाते हैं।

- अगर किसी बच्चे के मां-बाप के पास कोई आवासीय प्रमाणपत्र नहीं होता है तो वह उस बच्चे के लोकर गार्जियन बन जाते हैं।

- अपने इस सफर के बारे में विराट शाह कहते हैं, 'जब मैं छोटा था, तभी इसकी शुरुआत हो गई थी। मेरे पिता एक मिल मजदूर थे। उन्होंने कभी किसी को अपने दरवाजे से खाली हाथ नहीं लौटाया था। और इसी वजह से उन्हें एक रोज अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। स्कूलिंग पूरी करने के बाद मैंने एल. डी. इंजिनियरिंग कॉलेज में दाखिला ले लिया। पढ़ाई के दौरान मैं ट्यूशन दिया करता था। किसी से ट्यूशन के लिए पैसा लेना मुझे हमेशा तकलीफ देता था लेकिन मैं मजबूर था। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने कई कंपनियों में काम किया और तृप्ति से शादी की। वह एक केमिकल इंजिनियर हैं।'

- विराट की जिंदगी ने तब एक नई करवट ली जब उन्हें विदेश में काम करने का प्रस्ताव मिला। दो बेटियों के पिता विराट आगे बताते हैं, ' मैं पांच साल तक भारत के बाहर रहा। अच्छा खासा पैसा कमाने के बाद मैं वापस लौट आया। दुबई में मेरी सैलरी 3.5 लाख रुपये महीना थी। 2010 में भारत लौटने पर मैंने तय किया कि अब नौकरी नहीं करूंगा। इसकी जगह पर मैं झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को पढ़ाने का फैसला किया। पत्नी और बच्चों की अच्छी जिंदगी के लिए मैंने ठीक-ठाक कमा लिया था। सितंबर, 2014 में मैंने यह सफर 10 बच्चों के साथ शुरू किया था। 2015 में जब मैं इन बच्चों को नजदीक के नगर निगम स्कूल में दाखिले के लिए ले गया तो प्रिंसिपल ने ऐडमिशन देने से मना कर दिया। उसके बाद मैं उन बच्चों को गार्जियन बन गया।'

-विराट शाह दावा करते हैं कि वह ऐसे नौ फुटपाथ स्कूल चलाते हैं जिनमें 200 बच्चे पढ़ते हैं।