अहमदाबाद में चाय कारोबारी की अपहरण की गुत्थी सुलझी

भूपेंद्र सिंह, अहमदाबाद (18 मई): अहमदाबाद में चाय कारोबारी की अपहरण की गुत्थी सुलझ गई है। पुलिस ने कारोबारी के अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। इस वारदात को उन्होंने फिल्मी स्टाइल में अंजाम दिया था। पुलिस के शिकंजे में कैद इन बदमाशों की कहानी भी कुछ कम फिल्मी नहीं है। नकली सीबीआई, नकली पुलिस लेकिन गुनाह सब असली।

पहले बदमाश नकली सीबीआई अफसर बने, फिर किडनैप की कहानी रची और 35 करोड़ की फिरौती मांगी लेकिन जुर्म के दांत छिपते नहीं है और हुआ भी कुछ ऐसा ही गुजरात पुलिस के सामने इनकी एक ना चली। इस कहानी का असली मास्टर माइंड है महंत कपिल पांडेय। नकली सीबीआई अफसर बनकर इन शातिरों की टोली ने मणिनगर के चाय कारोबारी को अपना निशाना बनाया। सीबाआई अफसर बनकर जांच के लिए चाय का सैंपल लिया फिर लाम्भा के सुनसान इलाके में बुलाकार अगवा कर लिया।

इन बदमाशों ने ललित के पिता से 35 करोड़ रुपए फिरौती की मांग करनी शुरू कर दी, लेकिन पुलिस की पैनी नजर से किडनैपर घबरा गए और सिर्फ 30 हजार रुपए ललित से छिन कर छोड़ दिया। लेकिन ललित के एक सुराग ने किडनैपरों को शिकंजे के पीछे पहुंचा दिया। ललित ने पुलिस को बताया था कि किडनैपर अच्छी तरह से हिंदी बोलते थे, जिसके बाद गुजरात पुलिस ने बारीकी से जांच शुरू तो किडनैपिंग के तार यूपी के जौनपुर से निकले। गिरोह के सरगना महंत कपिल पांडे ने किडनैपिंग को सहीं अंजाम देने के लिए प्रोफेशनल अपराधियों की मदद ली थी।

गुजरात पुलिस ने गुनाह के यूपी कनेक्शन को आधार बनाकर जांच शुरु की और महंत कपिल पांडे की कॉल डिटेल्स के जरिए इस शातिर गैंग को दबोच लिया। महंत कपिल पांडे यूपी में एक आईटीआई कॉलेज का मालिक था और कर्ज चुकाने के लिए इसने अपने साथियों के साथ किडनैपिंग जैसे गुनाह को अंजाम दिया। इस शातिर गैंग के शिकंजे में आने के बाद अहमदाबाद के कारोबारियों ने चैन की सांस ली है।

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