बहादुर नाजिया पर आगरा को नाज़ था, अब स्कूल जाते हुए छेड़ते हैं गुंडे!

भूपेन्द्र शर्मा, आगरा (14 जुलाई): आगरा को नाजिया पर नाज था। वो बहादुर बेटी अकेले गुंडों से भिड़ गई थी। अपनी जान पर खेल कर एक मासूम को गुंडों से बचा लिया था। उसकी बहादुरी के तमगों से उसका घर भरा है। लेकिन खुद को गुंडों से नहीं बचा पा रही। क्योंकि जिस पुलिस ने बहादुरी का सम्मान किया था उसी की गोद में अब गुंडे बैठ गए हैं। नाजिया को स्कूल जाते हुए वो रोज़ छेड़ते हैं। पुलिस के पास पूरी जानकारी है। लेकिन वो मदद करने की बजाय नाजिया के पिता और भाइयों पर ही मामला बनाने की तैयारी में है।

किस किस से मुकाबला करे, कहां तक संघर्ष करे, कब तक लड़ती भिड़ती रहे। जब गुंडे मिलकर एक अकेली लड़की के परिवार के पीछे पड़ जाएं और पुलिस कार्रवाई के नाम पर आश्वासनों का पुलिंदा थमा दे तो एक बहादुर लड़की भी कब तक मुकाबला कर सकती है। नाजिया पस्त हो चुकी है। वही नाजिया जिसे एक दिन पूरे आगरा ने अपने सिर आंखों पर बिठाया था। इस जांबाज लड़की की बहादुरी को शहर के बड़े अधिकारियों से लेकर पुलिस प्रशासन और खुद सीएम अखिलेश यादव ने सम्मानित किया था। नाज़िया को बहादुरी के लिए रानी लक्ष्मी बाई वीरता पुरस्कार मिला था। आज भी नाजिया उतनी ही बहादुरी से लड़ रही हैं लेकिन सवाल है कब तक। 

नाजिया का घर आगरा के थाना मनटोला में है। पिछले साल अगस्त में स्कूल जा रही थी। रास्ते में देखा कि मोटरसाइकिल पर सवार कुछ गुंडे एक लड़की के अपहरण की कोशिश कर रहे हैं। नाजिया अकेले उन गुंडों से भिड़ गई और बच्ची को बचा लिया। उसकी बहादुरी के किस्से पूरे आगरा में मशहूर हैं। लेकिन इसके बाद की तकलीफ कोई नहीं जानता। इसके बाद की कहानी ये है कि नाजिया ने एक बार फिर बहादुरी दिखाते हुए अपने मोहल्ले में चलने वाली सट्टेबाजी को आसपड़ोस वालों की मदद से बंद करवा दिया। लेकिन इसके बाद सट्टेबाजी चलाने वाले गुंडे उसके पीछे पड़ गए। नाजिया कहती है कि जब उसे पस्त करने के लिए उसके पिता पर सट्टेबाजी चलाने वाली महिला ने रेप की झूठी शिकायत दर्ज करवा दी। भाइयों पर चोरी का इल्जाम लगा दिया। अब नाजिया नाउम्मीद हो रही है।

जिस पुलिस ने नाजिया की बहादुरी को सम्मानित किया है वही उसकी मदद नहीं कर रही। गुंडे स्कूल जाते वक्त नाजिया को छेड़ते हैं और पुलिस उन्हें नहीं पकड़ती। बहादुर नाजिया 4 दिन पहले खुद ही छेड़खानी करने वाले लड़के को पकड़कर थाने पहुंच गई। लेकिन पुलिस ने मनचले को एक घंटे बाद ही छोड़ दिया। अब नाजिया ने एसपी से गुहार लगाई है। कि आपकी पुलिस मेरे साहस का कबतक इम्तिहान लेगी।    ग्यारहवीं में पढ़ने वाली नाजिया ने अपनी बहादुरी से आसपड़ोस की लड़कियों को हौसला दिया था। आज उसकी हालत देखकर लड़कियां फिर से सोचने लगीं हैं कि क्या होगा आवाज़ उठाकर। जब इस दुनिया को चलाने वाले ही इसे बदलने को तैयार नहीं।