चुनाव के बाद EVM का क्या होता है? पढ़िए चुनाव आयोग के नियम

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (26 मई):  लोकसभा चुनाव में 40 लाख ईवीएम का इंतजाम किया गया था। देश में करीब 90 करोड़ मतदाता है, जिसमें से इस चुनाव में लगभग 60 करोड़ वोटर ने ही अपने वोट का इस्तेमाल किया। अब वोटों की गिनती पूरी हो चुकी है, चुनाव परिणाम भी आ चुका है। बीजेपी नरेन्द मोदी के नेतृत्व में दोबारा सरकार बनाने जा रही है. लेकिन सवाल उठता है कि अब ईवीएम का क्या होगा, कैसे वो दोबारा चुनाव में इस्तेमाल की जाएंगी।

अगर चुनाव कार्यों से जुड़े लोगों की मानें तो वोटों की गिनती पूरी होते ही ईवीएम को स्ट्रांग रूम में अंधेरे में रखवा दिया जाता है। अंधेरे में रखे जाते वक्त इस बात का खास ख्याल रखा जाता है कि वहां कोई दूसरी डिवाइस न हो। कागजी खानापूर्ति करने के बाद सभी उम्मीदवारों की मौजूदगी में ईवीएम को रखकर स्ट्रांग रूप में सील लगाई जाती है। जानकारों की मानें तो 45 दिन तक ईवीएम अंधेरे में रहती हैं। इस दौरान अगर कोई उम्मीदवार गड़बड़ी के आरोप लगाता है और अगर दोबारा से मतगणना होती है तो ईवीएम में मौजूद वोटों को फिर से गिना जाता है। 

उम्मीदवार को विजेता घोषित करने के बाद EVM को एक बार फिर से स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है, और रूम को बंद कर एक बार फिर सील किया जाता है। ये प्रक्रिया उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में की जाती है। इनके हस्ताक्षर लिए जाते हैं। चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा, "चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद उम्मीदवारों को 45 दिन का वक्त दिया जाता है। इस अवधि के दौरान अगर उम्मीदवार को मतगणना प्रक्रिया पर संदेह है तो वह फिर से मतगणना के लिए आवेदन कर सकता है। 45 दिन की समय सीमा गुजर जाने के बाद मतगणना के लिए आवेदन नहीं दिया जा सकता है।"

चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि चुनाव के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले कुल EVM का 20 प्रतिशत रिजर्व के रूप में रखा जाता है ताकि अगर तकनीकी दिक्कतें होने पर अतिरिक्त EVM से काम चलाया जा सके। चुनाव आयोग के अधिकारी ने कहा कि EVM दूसरे इलेक्ट्रानिक डिवाइस की तरह होते हैं, अगर इन्हें ठीक से रखा जाए तो ये अच्छा काम करते हैं बेहद सुरक्षित होते हैं। इनमें किसी किस्म की छेड़छाड़ की दूर-दूर तक गुंजाइश नहीं है।