कालेधन पर 'सर्जिकल स्ट्राइक पार्ट 2'- अब इन पर है मोदी सरकार की नजर... जानिए

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (30 दिसंबर): 8 नवंबर को कालेधन पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' के बाद मोदी सरकार किस पर करेगी 'सर्जिकल स्ट्राइक-पार्ट 2'? पीएम मोदी का अगला निशाना कौन होगा? क्या नोटबंदी के बाद बेनामी संपत्ति, बेनामी लेनदेन और अवैध सोना रखने वालों पर गिरेगी गाज? ऐसे कुछ सवाल इस समय देश में चारों ओर चर्चा का विषय हैं। विशेषज्ञों का भी मानना है कि नोटबंदी के बाद जिस तरह मोदी सरकार कालेधन पर हमला कर रही है उससे आने वाले वक्त में काले धनकुबेरों का बचना मुश्किल है। आइए जानते हैं 2017 में मोदी सरकार के टारगेट पर कौन-कौन होंगे-

1) बेनामी संपत्ति

पीएम मोदी नोटबंदी के बाद बेनामी संपत्ति रखने वाले लोगों के खिलाफ अभियान छेड़ने का ऐलान कर चुके हैं। पीएम ने 25 दिसंबर को 'मन की बात' कार्यक्रम में बेनामी प्रॉपर्टी पर रोक लगाने के लिए ज्यादा सख्त कानून लाने की बात की थी। इस सिलसिले में बेनामी संपत्ति निरोधक कानून, 1988 में इस साल बदलाव में भी किया गया है। पीएम मोदी के शब्दों में ठंडे बस्ते में रहा कानून, हमने उसको निकाला और बड़ा धारदार कानून बनाया है, आने वाले दिनों में वो कानून भी अपना काम करेगा। गौरतलब है कि 1 नवंबर से लागू हुए प्रोहिबिशन ऑफ बेनामी प्रॉपर्टीज ट्राजैक्शंस ऐक्ट के तहत बेनामी संपत्ति रखने वाले लोगों को 7 साल तक की कैद की सजा का प्रावधान रखा गया है। यही नहीं दोषी की संपत्ति भी जब्त कर ली जायेगी।

क्या है बेनामी संपत्ति- बेनामी संपत्ति ऐसी संपत्त‍ि है जो बिना नाम की होती है। जब संपत्ति खरीदने वाला अपने पैसे से किसी और के नाम पर प्रॉपर्टी खरीदता है तो यह बेनामी प्रॉपर्टी कहलाती है। जो लोग बेटा, बेटी, पति, पत्नी के नाम पर संपत्ति खरीदते हैं, लेकिन इनकम टैक्स से जुड़े डिक्लेरेशन में इसका कोई जिक्र नहीं होता, बेनामी संपत्ति है।

चल या अचल दोनों रूपों में हो सकती है बेनामी संपत्ति- बेनामी संपत्ति चल या अचल संपत्त‍ि या वित्तीय दस्तावेजों के तौर पर हो सकती है। इसमें संपत्त‍ि के एवज में भुगतान करने वाले के नाम से कोई वैध दस्तावेज नहीं होता है। ऐसे मामलों में बेनामी लेनदेन में शामिल दोनों पक्षों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

बेनामी संपत्ति कानून के दायरे से बाहर हैं ये-  पत्नी, बच्चों, माता-पिता के नाम खरीदी गई संपत्त‍ि और आय के घोषित स्रोत के जरिये चुकाई गई रकम बेनामी संपत्त‍ि के दायरे में नहीं आती। भाई, बहन, पत्नी, बच्चों के नाम खरीदी गई ज्वाइंट प्रॉपर्टी जो आय के ज्ञात स्रोतों से खरीदी गई हो, बेनामी संपत्त‍ि नहीं कहलाती है।

2) सोना

मोदी सरकार ने एक और क्रन्तिकारी कदम उठाते हुए इस बार अपना निशाना अवैध रूप से सोना रखने वालों को बनाया है। मोदी सरकार ने घर में रखे सोने के लिए नए नियम जारी कर दिए हैं। अगर आपने एक लिमिट से ज्यादा सोना रखा है तो आपने अवैध सोना जमा कर रखा है।

सरकार ने जारी किए नए नियम- नए नियमों के तहत शादीशुदा महिलाओं के पास 500 ग्राम, अविवाहित लड़कियां 250 ग्राम सोना, एक घर में पुरुषों को 100 ग्राम तक के सोने पर कोई हिसाब नहीं मांगा जाएगा और उनके पास इतना सोना होने पर कोई पूछताछ नहीं होगी। घर में रखे सोने पुश्तैनी गहनों और सोने पर भी टैक्स नहीं लगेगा।

नोटबंदी की घोषणा के बाद कालेधन से खरीदा गया सोना- खबर के मुताबिक 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के तुरंत बाद लोग नोटों का बैग भरकर ज्वैलर्स की दुकान पर पहुंच गए। लोगों ने आधी रात तक सोने की खरीदारी की। करीब 4 घंटे (8 से 12 बजे) में लोगों ने 1600 करोड़ रुपए मुल्य के 4 टन सोने की खरीदारी की।

भारत सोने में दुनिया का दूसरा बड़ा खरीदार, लेकिन काला धंधा हावी- भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। भारत में हर साल लगभग 1 हजार टन सोने का आयात होता है। अनुमान है कि सोने की 1 हजार टन सालाना खपत का एक-तिहाई भुगतान ब्लैक मनी में किया जाता है।

भारत में करीब 22,000 टन सोना मौजूद- वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में करीब 22,000 टन सोना मौजूद है। जी हां 22 हजार टन सोना, जो करीब 65 लाख करोड़ रुपये का है। इसके बावजूद भारत दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर देश है। ऐसे में अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए हर वर्ष 900-1,000 टन सोना आयात किया जाता है।

3) अघोषित आय वाले खाते

नोटबंदी के बाद अब तक बैंकों में जमा हुए करीब 4 लाख करोड़ रुपये संदिग्ध हो सकते हैं। आयकर विभाग ऐसे अघोषित आय वाले खातों को नोटिस भेजने की तैयारी कर रही है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास मौजूद 17 दिसंबर तक के डेटा के मुताबिक 1.14 लाख खातों में यह 4 लाख करोड़ रुपये जमा हुए हैं। आयकर अधिकारियों का अनुमान है कि इस राशि में बड़ा हिस्सा उन लोगों का हो सकता है, जो कर चोरी में शामिल रहे हैं। अब तक विभाग की ओर से बैंक खातों में बड़ी राशि जमा कराने वाले करीब 5,000 लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं।

60 लाख लोगों ने जमा कराए 7 लाख करोड़- सूत्रों के मुताबिक करीब 60 लाख व्यक्तियों और संस्थाओं ने बैंकों में 7 लाख करोड़ रुपये के पुराने नोट जमा कराए हैं। हालांकि सरकार का मानना है कि इनमें से कुछ हिस्सा 'सांस्थानिक स्रोतों' से आया हुआ हो सकता है, जिसके बारे में ब्योरा दिया जा सकता है।

1.77 लाख लोगों ने चुकाया 25 लाख से अधिक का लोन- टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक 10 नवंबर से महीने के अंत तक कुल 1.77 लाख कर्जधारकों ने 25 लाख रुपये से अधिक तक का लोन अदा कर दिया। डिपार्टमेंट उन लोगों की जांच करेगा, जिन्होंने कैश के जरिए लोन चुकाया है। इसके अलावा उन बैंक खातों पर भी नजर है, जिनमें बिना केवाईसी के 1 करोड़ रुपये जमा हुए हैं।

4) जनधन खाते

देश में जनधन योजना के तहत 25 करोड़ 68 लाख खाते हैं। 9 से 23 नवंबर के बीच 16.48 लाख नए जनधन खाते खोले गए। जनधन योजना में जीरो बैलेंस बैंक खाते थे लगभग 10 करोड़। 2 नवंबर 2016 तक देश में कुल जन-धन खाते थे 24 करोड़। 10 से 30 नवंबर के बीच 27 लाख से ज्यादा जनधन खाते खोले गए। नवंबर तक जनधन खातों में जमाराशि 74,321.55 करोड़ हो चुकी थी।

2.64 खातों में एक एक लाख रुपये हुए जमा- 8 नवंबर से 13 दिसंबर तक प्रधानमंत्री जन धन योजना के 25 करोड़ बैंक खातों में से 2.64 खातों में एक-एक लाख रुपये से अधिक के पुराने नोट जमा हुए। ऐसे खातों में कुल 4,136 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। खास बात यह है कि जन धन के एक खाते में तो 58 लाख रुपये के पुराने नोट जमा हुए। वहीं 34 खाते ऐसे मिले जिनमें प्रत्येक में दस लाख रुपये से अधिक के पुराने नोट जमा हुए हैं।

4.86 खातों में 30 से 50 हजार हुए जमा- इसी तरह जन धन के 4.86 खाते ऐसे पकड़े गए जिनमें 30 हजार रुपये से 50,000 रुपये के बीच जमा हुए हैं। जन धन के खातों में अधिकांश राशि पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और दिल्ली में जमा हुई है। हालांकि अधिकारी ने कहा कि जन धन के खातों में जमा हुई राशि चिंताजनक नहीं है।

उत्तर प्रदेश में हुए सबसे ज्यादा जमा- उत्तर प्रदेश में 3.8 करोड़ जनधन खातों में सबसे अधिक 12,021.32 करोड़ रुपये जमा थे। पश्चिम बंगाल में 2.44 करोड़ खातों में 9,193.75 करोड़ रुपये जमा थे। राजस्थान में जनधन खातों की संख्या 1.9 करोड़ और इनमें जमाराशि 6,291.1 करोड़ रुपये, बिहार में 2.62 करोड़ खातों में 6,160.44 करोड़ रुपये जमा थे।

5) कोऑपरेटिव बैंक

इनकम टैक्स के रडार पर नए तीन हजार से ज्यादा कोऑपरेटिव बैंक के अकाउंट होल्डर है, जिनके बैंक अकाउंट इन कोऑपरेटिव बैंक में नोटबंदी के बाद खोले गए है, इनकम टैक्स विभाग की नजर मुंबई व महाराष्ट्र के कोऑपरेटिव बैंक के साथ-साथ गोवा के कोऑपरेटिव बैंको पर भी हैं।  इनकम टैक्स उन 4,500 खातों की जांच कर रहा है जिन्हें नोटबंदी (500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बैन करना) के फैसले के बाद या तो खोला गया या फिर उन्हें एक्टिव करवाया गया। सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र, गोवा और दमन में साखाएं संचालित करने वाले इस बैंक में बीते डेढ़ महीनों के दौरान पुराने नोटों में करीब 275 करोड़ रुपए जमा हुए हैं। पिछले हफ्ते किए गए एक सर्वे के मुताबिक कर अधिकारियों ने यह पाया कि 10 नवंबर के बाद करीब 3000 नए खाते खोले गए जबकि 1500 निष्क्रिय खातों को फिर से चालू करवाया गया।

ईडी ने देशभर के कोऑपरेटिव बैंकों से मांगी जानकारी- केन्द्र सरकार को फाइनेंशियल इटेंलीजेंस यूनिट और आरबीआई ने सूचना दी थी कि देश के कुछ सहकारी बैंको मे नोटबंदी के बाद इसी तरह की धांधलियां हो रही हैं, जिनकी जांच की जानी चाहिए, इस सूचना के बाद ईडी ने देशभर के सहकारी बैंकों को चिट्ठी लिखकर कुछ जानकारियां मांगी हैं। बंद पड़े खातों में अचानक बड़ी रकम कहां से जमा हुई? क्या जिसके नाम पर खाता है पैसे उसी ने जमा कराए हैं?

कई कोऑपरेटिव बैंक जांच के दायरे में- मुबंई में श्यामराव विट्ट्ल कोओपरेटिव बैकं ने आरबीआई को अपने रिकार्ड में 1450 करोड रुपये जमा कराए लेकिन जांच हुआ तो नोटो में तीन सौ करोड से ज्यादा के नोट कम मिले। मालवा ग्रामीण बैंक ने स्टेट बैंक आफ पटियाला में पंजाब की विभिन्न शाखाओं से 130 करोड रुपये पुराने नोटो में जमा कराए औऱ अपना कर्जा चुका दिया। सूरत में एक्सिस बैंक के खाते में सूरत कोआपरेटिव सोसायटी ने 350 करोड रुपये पुराने नोटो मे जमा कराए और आरटीजीएस के जरिए कही और भेज दिए।