जलीकट्टू के बाद अब इस खेल से बैन हटाने की मांग हुई तेज

नई दिल्ली ( 22 जनवरी ): पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में जलीकट्टू पर्व मनाने का रास्ता साफ हो गया है। अब इसके बाद कर्नाटक में तटीय जिलों के दलदली खेतों में सालाना भैंसा दौड़ ‘कंबाला’ के आयोजन की मांग तेज हो गई है। कंबाला समितियों ने अपने आंदोलन की रणनीति तय करने के लिए रविवार मंगलुरु में बैठक करने का फैसला किया है। कंबाला समिति के अध्यक्ष अशोक राय ने बताया, 'उडुपी और मंगलुरु क्षेत्रों से कंबाला प्रेमी तथा 150 से 200 जोड़ी भैंसा इसमें भाग लेंगे।'

अशोक ने कहा कि कंबाला के लिए भी इजाजत मिलनी चाहिए, क्योंकि इसमें किसी तरह की हिंसा नहीं होती। यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। कंबाला समितियों ने इसके आयोजन पर कर्नाटक उच्च न्यायालय के स्थगन को हटाने के लिए एक अंतरिम याचिका भी दायर की है। इस मामले को शुक्रवार को उच्च न्यायालय ने 30 जनवरी के लिए स्थगित कर दिया था। अशोक राय ने बताया, 'अगले सप्ताह बुधवार या गुरुवार को हम लोग क्षेत्र में आंदोलन छेड़ने की रणनीति बना रहे हैं। मंगलुरु में बड़े पैमाने पर आंदोलन कर हम राजनेताओं और पूरे देश का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करेंगे।'

पिछले साल नवंबर में पशु अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था PETA की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने कंबाला पर रोक लगाने का फैसला सुनाया था। कंबाला कमिटी के सदस्य पी.आर. शेट्टी ने कहा, 'पेटा की गलत भावनाओं के चलते कंबाला के आयोजन में बाधाएं आई हैं। हमें भरोसा है कि हम इस मामले में कानूनी जीत हासिल करेंगे। कंबाला और जलीकट्टू में बड़ा अंतर है।' इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी कंबाला का सपोर्ट करने वालों की तादाद बढ़ रही है।