आउटसोर्सिंग बंद, लाखों भारतीय हो सकते हैं बेरोजगार

नई दिल्ली ( 5 फरवरी ): भारतीय आईटी इंडस्ट्री के सामने अब एच-1बी वीजा के अलावा भी दो ऐसी चुनौतियां सामने आई हैं, जो आने वाले दिनों में चिंता की वजह साबित हो सकती हैं। अमेरिकी संसद में बीते दो सप्ताह के दौरान दो ऐसे विधेयक पेश हुए हैं, जो घरेलू टेक सेक्टर की संभावनाओं पर असर डाल सकते हैं। H-1B वीजा बिल में जहां न्यूनतम वेतन को 60,000 अमेरिकी डॉलर से 1,30,000 अमेरिकी डॉलर करने का प्रस्ताव है। वहीं, आउटसोर्सिंग समाप्ति अधिनियम में राज्यों की ओर से आउटसोर्सिंग पर रोक लगाने का प्रावधान प्रस्तावित है।

इसके अलावा 2007 के एक विधेयक को भी सीनेटर्स चक ग्रैसली और डिक डर्बिन की ओर से दोबारा पेश किया गया है। इसमें H-1B वीजा प्रोग्राम के प्रावधानों को दोबारा से तय करने की मांग की गई है। यह बिल ऐसे वक्त में पेश किया गया है, जब इस बात की चर्चाएं चल रही हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप एच-1बी वीजा नियमों में सुधार को लेकर कार्यकारी आदेश जारी कर सकते हैं।

अमेरिकी संसद की न्यायिक समिती के चेयरमैन ग्रैसली और असिस्टेंट डेमोक्रेटिक लीडर डर्बिन ने ऐलान किया है कि वे अमेरिका वर्कर्स को प्राथमिकता देने और वीजा प्रोग्राम में निष्पक्षता बहाल करने के लिए विधेयक पेश करेंगे। ग्रैसली ने कहा, 'कांग्रेस ने इन प्रोग्राम्स की शुरुआत अमेरिकी हाई-स्किल वर्कफोर्स को और बेहतर करने के लिए की थी। लेकिन इसकी बजाय अब अमेरिकी वर्कर्स को ही रीप्लेस किया जा रहा है।'

एच-1बी वीजा प्रोग्राम की आलोचना करते हुए ग्रैसली ने कहा कि कुछ कंपनियां इसका दुरुपयोग कर रही हैं और सस्ती वर्कफोर्स के चलते अमेरिकियों की उपेक्षा कर रही हैं। 20 जनवरी को पेश किए गए विधेयक में एच-1बी वीजा के लिए अमेरिका में ही पढ़ने वाले विदेशी छात्रों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

इसके अलावा 30 जनवरी को तीन डेमोक्रेटिक सांसदों जोए डॉनली, शेरॉड ब्राउन और किर्स्टन गिल्लीब्रैंड ने 'आउटसोर्सिंग समाप्ति अधिनियम' पेश किया है। इस विधेयक में मांग की गई है कि नौकरियां आउटसोर्स करने वाली कंपनियों को टैक्स में छूट नहीं दी जानी चाहिए, इसके अलावा उन्हें अमेरिकी सरकार के साथ कोई काम करने की अनुमति भी नहीं मिलनी चाहिए।