चैंपियंस ट्रॉफी के बाद अपने करियर को लेकर कर सकते हैं धोनी बड़ा ऐलान


नई दिल्ली (3जून): आइसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के बाद संन्यास ले सकते हैं टीम इंडिया के विकेटकीपर-बल्लेबाज व पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी  यूं तो कई बार बड़े टूर्नामेंट से पहले उनके भविष्य को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं लेकिन इस बार आसार कुछ ज्यादा मजबूत नजर आ रहे हैं। ये हैं इसके 5 अहम कारण।


 धौनी को क्रिकेटर बनाने वाले कोच का बयान....


माही चैंपियंस ट्रॉफी के बाद क्रिकेट को अलविदा कह सकते हैं महेंद्र सिंह धौनी को विकेटकीपिंग ग्लव्स थमाकर उन्हें फुटबॉल से क्रिकेट की ओर ले जाने वाले उनके कोच केशव बेनर्जी धौनी से अच्छी तरह वाकिफ हैं। कुछ महीने पहले बेनर्जी ने मीडिया को दिए अपने बयान में संकेत दिए थे कि, बस ये उनके फॉर्म पर निर्भर करेगा।


 कोच बेनर्जी के मुताबिक धौनी हमेशा से ही उन खिलाड़ियों में से रहे हैं जो नहीं चाहते कि उन पर कोई अंगुली उठाए, इसलिए इससे पहले ऐसी नौबत आए, माही खुद ही फैसला ले लेंगे। जब उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था तब भी उन्होंने किसी को भी इसकी जानकारी नहीं दी थी। यहां तक अपने खास लोगों को भी नहीं। टेस्ट में माही का प्रदर्शन गिरा था तो उन्होंने अचानक खुद ही अलविदा कहने का फैसला ले लिया। अगर चैंपियंस ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा तो वो एक बार फिर से सबको चौंका सकते हैं।


 काफी कुछ कहती है उम्र....


 आपको बता दें कि धौनी की उम्र इस वक्त 35 वर्ष है और आने वाले 7 जुलाई को वो 36 साल के हो जाएंगे। अगर वो 2019 विश्व कप में खेलने का मन बनाते हैं तो उस समय तक वो 38 साल के हो जाएंगे। वरिष्ठ खेल विशेषज्ञ हरपाल सिंह बेदी कहते हैं, 'उम्र को खेल से जोड़ना सही है लेकिन धौनी के अब तक के फैसले काफी चौंकाने वाले रहे हैं। वो एक विकेटकीपर बल्लेबाज हैं ऐसे में जाहिर तौर पर मैदान पर उन्हें बाकी खिलाड़ियों से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में अच्छी फिटनेस का होना बेहद जरूरी है।


 अगर माही कप्तान होते तो तो भी उनकी अगुआइ के लिए शायद टीम में बरकरार रखा जाता लेकिन अगर एक विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में उनके चयन की बात करें तो उन्हें अब अपने प्रदर्शन से ही चयनकर्ताओं का दिल जीतना होगा। उन्होंने भारतीय क्रिकेट के लिए जो कुछ भी किया है, उसको सलाम है लेकिन क्रिकेट में उम्र की मार ने ज्यादातर दिग्गज क्रिकेटरों को नहीं बख्शा है, नहीं भूलना होगा कि माही को मध्यक्रम में दबाव के बीच बल्लेबाजी के साथ-साथ विकेट के पीछे हर गेंद पर उठक-बैठक भी करनी होगी।



 आइपीएल करियर आगे ले जाना है....


 अपने आइपीएल करियर में कुछ साल और जोड़ने हैं तो धौनी को वनडे क्रिकेट से संन्यास लेना ही बेहतर रहेगा। वो अंतरराष्ट्रीय टी20 खेल सकते हैं क्योंकि टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों का आयोजन वैसे भी कम ही होता है। इस साल आइपीएल में धौनी ने 16 मैचों में 26.36 की औसत से 290 रन ही बनाया और टूर्नामेंट के दौरान कई मौकों पर उनकी फिटनेस को लेकर भी सवाल उठते रहे। इस दौरान धौनी ने विकेट के पीछे 10 कैच लिए जबकि 3 स्टंपिंग की। चैंपियंस ट्रॉफी से ठीक पहले अभ्यास मैच के दौरान जब धौनी ने विकेटकीपिंग ग्लव्स दिनेश कार्तिक को थमाकर फील्डिंग करने का फैसला किया, उसके पीछे वजह सिर्फ कार्तिक को कीपिंग करने का मौका देना नहीं था बल्कि धौनी को कीपिंग से आराम देना भी एक कारण था। धौनी की आने वाले आइपीएल में टीम पुणे अब नहीं खेलेगी यानी अगले साल की नीलामी में उनकी बोली लगेगी। कौन खरीदेगा,  कितनी ज्यादा  मांग रहेगी, आने वाले समय ये भी कुछ बड़े सवाल होंगे।


 विकल्प भी तैयार हैं, टीम भी तैयार है.....


एक विदेश दौरे पर खराब प्रदर्शन के बाद धौनी ने कुछ सालों पहले कहा था कि वो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को तब अलविदा कहेंगे जब उनका विकल्प तैयार हो जाएगा। ये बयान कप्तानी के साथ-साथ उनके करियर से भी जुड़ा था। कप्तानी में विराट जब सक्षम दिखे तो उन्होंने ये जिम्मेदारी छोड़ दी, अब विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में भी कुछ ऐसे युवा खिलाड़ी तैयार होते नजर आ रहे हैं जिन्हें आगे के लिए तैयार किया जा सकता है। इनमें युवा रिषभ पंत और संजू सैमसन के अलावा और भी अनुभवी रिद्धिमान साहा और पार्थिव पटेल के नाम भी शामिल हैं।


5. कई कप्तानों का हो चुका है बुरा हाल, धौनी कभी नहीं चाहेंगे ऐसा.....


 आपको बता दें कि भारतीय क्रिकेट का जो इतिहास है वो इस बात का गवाह है कि यहां कप्तानों का अंत निराशाजनक अंदाज में होता आया है। चाहे जितना महान खिलाड़ी क्यों न हो, उसकी कप्तानी अजीबोगरीब अंदाज में हाथ से जाती है। कपिल की टीम 1987 के विश्व कप सेमीफाइनल में हारी तो उनको कप्तानी से हटा दिये गये। 1996 में सचिन तेंदुलकर को कप्तान बनाने के लिए अजहर को कप्तानी से हटा दिया गया था, हालांकि बाद में फिर वो कप्तान बने और फिर मैच फिक्सिंग ने उनका करियर निगल लिया।


 सचिन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था जब उन्हें बिना बताए कप्तानी से हटाया गया था। 2007 में राहुल द्रविड़ को भी विश्व कप में टीम इंडिया के शर्मनाक प्रदर्शन के बाद भारत लौटकर इस्तीफा देना पड़ा। पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली का भी हाल तो सबको याद है। एक गलत कोच (ग्रेग चैपल) भारतीय क्रिकेट से जुड़ा और उसने ऐसी फूट डाली कि 2005 में गांगुली जैसे दिग्गज कप्तान से न सिर्फ ये जिम्मेदारी छीनी गई बल्कि इसके साथ-साथ उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। जाहिर तौर पर धौनी के करियर में अब तक उन्होंने जो फैसले लिए, वो खुद से लिए हैं और वो नहीं चाहेंगे कि ताजा विवादों के बीच उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाय।



वहीं ज्यादातर खेल विशेषज्ञों का यही मानना है कि धौनी महान रहे हैं और ये उनका खुद का फैसला ही होगा, वरिष्ठ खेल पत्रकार, कमेंटेटर और लेखक मनोज जोशी कहते हैं, 'संन्यास का उनका फैसला खुद का होगा। धौनी ऑल टाइम ग्रेट रहे हैं। जिस टेस्ट क्रिकेट में धौनी के कमजोर आंकड़े आंके गए हैं, उसी टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने किरन मोरे, सइद किरमानी और नयन मोंगिया जैसे धुरंधरों को विकेटकीपर-बल्लेबाज के आंकड़ों को पीछे छोड़ा। वनडे में दुनिया के बेहतरीन मैच फिनिशर में एक हैं। कुछ उनके शॉट्स ऐसे रहे जो इस सहजता से खेले कि दुनिया देखती रह गई। उन्होंने साबित कर दिया कि वो खुद को बेहतर साबित कर सकते हैं। युवा खिलाड़ियों को उनसे सीखना चाहिए। अगर आने वाले विकेटकीपर-बल्लेबाज सीख गए तो इस क्षेत्र में अच्छा रहेगा।