50 साल 'लिव इन' में रहने के बाद की शादी, पोते-पड़पोते बने बाराती

नई दिल्ली (30 मई): राजस्थान के उदयपुर मे एक गांव है रूपानी,इस गांव में 'लिव इन' की परंपरा सदियों पुरानी है। कुछ लोग दो-चार या छह साल तक 'लिव इन' में रहने के बाद शादी करते हैं, कुछ बच्चे हो जाने के बाद शादी करते हैं तो कुछ ऐसे भी हैं जो अपनी चौथी पीढी आ जाने तक 'लिव इन' में रहते हैं और फिर शादी करते हैं। यह मज़ाक नहीं हकीकत है।

पिछले 50 साल से 'लिव इन'में रह रहे रुपानी के  पबूरा खेर ने अपनी 70 साल की संगिनी रूपली से बीते दिन ब्याह रचाया। इससे पहले दोनों के घरों में हल्दी, तैल, मेंहदी, चूल्हा-चाकी मंढाह (मण्डप)और फेरे सब वैसे ही हुए जैसे किसी नये दूल्हा-दुल्हन के घर होते हैं। 70 साल की रूपली और 80 साल के पबूरा की शादी में 30 बाराती तो उनके अपने परिवार के थे। रूपली और पबूरा के दो बेटे और पांच बेटियों के कुछ बच्चों की भी शादी हो चुकी है और उनके भी बच्चे हैं। बीते शनिवार को हुई शादी में ये सभी शामिल हुए। बारात गाजे बाजे के साथ रूपानी के मायके पहुंची।

वहां रूपानी के भाईयों ने कन्यादान हुआ और रविवार को फिर रूपानी अपने पति पबूरा के साथ घर लौट कर आयी। रूपानी और पबूरा की बिरादरी में 'लिव इन'की परंपरा तो है ही लेकिन इन लोगों के साथ एक खास भी थी। जब इन दोनों ने साथ रहने का फैसला किया तो उनके पास शादी का खर्च उठाने का पैसा नहीं था। इसी बीच बच्चे हो गये। उनका खर्च बढ़ गया। फिर फैसला टल गया। जब पौते-पड़पौते हो गये तो गांव वालों ने कहा कि अब उन दोनों को भी शादी संस्कार होना जरूरी है। बस इसी बात पर कोटरा ब्लॉक की मण्डवा पंचायत के लोगों ने पंडित को बुला कर पत्रा बांची और रूपानी और पबूरा की शादी करवा दी।