400 साल बाद प्रथा तोड़कर पुरुषों ने मंदिर की मूर्तियों को हटाया

केंद्रपाड़ा(23 अप्रैल): सतभाया गांव में बीते 400 साल से यह चली आ रही एक प्रथा रविवार को तोड़ दी गई। मां पंचबाराही के मंदिर में स्थापित पांच मूर्तियों को पुरुष हाथ नहीं लगा सकते, केवल स्थानीय मछुआरा समुदाय की विवाहित दलित महिलाएं ही पूजा-पाठ कर सकती हैं। लेकिन अब इस प्रथा को तोड़ दी गई है।

यह जरूरत पड़ी क्योंकि जलवायु परिवर्तन के चलते बढ़ता समुद्री जलस्तर मंदिर के लिए खतरा बनता जा रहा था। इस वजह से मंदिर की सैकड़ों साल पुरानी व्यवस्था को तोड़ने की मजबूरी सामने आई। प्राचीन मंदिर से 12 किलोमीटर दूर बने नए मंदिर में इन मूर्तियों को भेजने के लिए महिला पुजारियों ने पुरुषों की मदद ली। 

एक पुजारी सबिता दालेई ने बताया, 'इन पवित्र काली मूर्तियों को हटा पाना हम महिलाओं के लिए संभव नहीं था। कई टन वजनी मूर्तियों को नए मंदिर ले जाने के लिए हमें कई लोगों की जरूरत पड़ी।' करीब डेढ़ टन वजन वाली इन मूर्तियों को 400 साल बाद पुरुषों ने स्पर्श किया। नए मंदिर पहुंचने के बाद विधि-विधान से इनका शुद्धिकरण किया गया। 

बता दें, काफी वक्त से समंदर सतभाया की ओर बढ़ता जा रहा था। 50 साल पहले जहां समुद्र मंदिर से करीब पांच किलोमीटर दूर हुआ करता था, अब मंदिर और समुद्र के बीच केवल कुछ मीटर का फासला रह गया था। पूरे दिन पूजा-पाठ और भजन के बीच यह कार्यक्रम चला और मूर्तियों की पुनर्स्थापना की गई।