HeartofAsia: पाकिस्तान पर बरसे अफगान राष्ट्रपति, दे डाली नसीहत

नई दिल्ली(4 दिसंबर): हार्ट ऑफ एशिया' सम्मेलन में बोलते हुए अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने जहां भारत के सहयोग और दोस्ती का बार-बार जिक्र किया, वहीं पाकिस्तान का जिक्र एक बार फिर आतंकवाद के सिलसिले में ही आया। उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को सख्त हिदायत भी दी।

- गनी ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा, 'इस ऐतिहासिक और खूबसूरत शहर अमृतसर में सम्मेलन का आयोजन करने के लिए मैं भारत के लोगों को शुक्रिया कहना चाहता हूं। यह वह शहर था जो कि भारत को मध्य एशिया, रूस और दुनिया के बाकी हिस्सों से जोड़ता था।'

- आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरते हुए राष्ट्रपति गनी ने कहा, 'पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के विकास के लिए 500 मिलियन डॉलर देने की घोषणा की। श्रीमान सरताज अजीज, यह रकम आतंकवाद से निपटने में अच्छी तरह खर्च हो सकती है क्योंकि बिना शांति के कोई विकास नहीं हो पाएगा।' उन्होंने कहा, 'हमें सरहद पार से होने वाले आतंकवाद को पहचानना और समझना होगा और साथ मिलकर आतंकवाद से लड़ने के लिए फंड बनाना होगा।' राष्ट्रपति गनी के भाषण से भारत और पाकिस्तान की वैश्विक भूमिकाओं का अंतर खुलकर सामने आ रहा था। उनके भाषण में जहां भारत का जिक्र सहयोग और सकारात्मक मुद्दों को लेकर था, वहीं पाकिस्तान का जिक्र आतंकवाद से जुड़े मसलों तक ही सीमित रहा।

- पाकिस्तान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'पाकिस्तानी सेना द्वारा अपनी जमीन पर सक्रिय आतंकवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने से उनमें से कई आतंकवादी नेटवर्क अफगानिस्तान की सीमा में घुस आए हैं। ये आतंकी नेटवर्क हमारे लिए खतरा हैं।' पाकिस्तान द्वारा आतंकियों को शरण देने के अपने पुराने आरोपों की ही लाइन में राष्ट्रपति गनी ने कहा, 'तालिबान मूवमेंट से जुड़े एक प्रमुख शख्स काकाजादा ने हाल ही में कहा कि अगर उनके पास पाकिस्तान में एक सुरक्षित पनाह नहीं होता, तो वे एक महीने भी नहीं टिक पाते।'

- गनी ने कहा, 'हम आरोप नहीं लगाना चाहते, लेकिन हम खासतौर पर अपने पड़ोसी पाकिस्तान से यह कहना चाहते हैं कि वह जांच करे कि उसकी जमीन का इस्तेमाल सरहद पार आतंकवाद निर्यात करने के लिए होता है या नहीं।' - गनी ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद कहते हुए कहा, 'आप इस साल 2 बार महत्वपूर्ण परियोजनाओं के उद्घाटन के लिए अफगानिस्तान आए। इसके लिए आपका बहुत शुक्रिया।' राष्ट्रपति गनी ने कहा कि उनका देश दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ अपने संबंधों को और आगे लेकर जाना चाहता है। उन्होंने भारत के सहयोग से बनाए जा रहे सलमा बांध और हाइड्रो पावर प्रॉजेक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इतने लंबे इंतजार के बाद भारत की मदद के यह शुरू हुआ है और इसके कारण अफगानिस्तान के कई घरों में रोशनी आएगी। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी, आपके शब्द अफगानिस्तान के लोगों को भारत की सवा सौ करोड़ आबादी के सहयोग का भरोसा देते हैं। आपकी मदद से दोनों देशों के बीच का ऐतिहासिक संबंध और मजबूत होगा।'

- उन्होंने बड़ी संख्या में भारत के अंदर रह रहे अफगानी शरणार्थियों और भारतीय कॉलेजों में पढ़ रहे अफगान छात्रों का भी जिक्र किया। इन सभी क्षेत्रों में भारत की ओर से लगातार सहयोग किए जाने को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद कहा। गनी ने कहा कि अफगानिस्तान के विकास और वहां हालात बेहतर करने की दिशा में भारत का विस्तृत सहयोग काफी मायने रखता है। उन्होंने कहा, 'भारत ने मदद के लिए ना तो कोई गुप्त समझौता किया और ना ही कभी कोई शर्त ही रखी। भारत के इरादे और उनका तरीका हमेशा से पारदर्शी बना रहा है।' उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा अमेरिकी सैनिकों के अभी अफगानिस्तान में बने रहने के फैसले का भी स्वागत किया।