जानिए, हिटलर से जुड़ा एक राज़ जिसपर से आज तक नहीं उठा पर्दा

नई दिल्ली (30 अप्रैल): आज यानि 30 अप्रैल वो दिन है जब दुनिया के सबसे खूंखार तानाशाह की मौत हुई थी। ये मौत बेहद रहस्यमयी थी। कई लोगों ने दावा किया कि हिटलर ने खुदकुशी की थी तो कुछ लोगों ने कहा कि हिटलर कई साल तक ज़िंदा रहा। लेकिन आज हम आपको बता रहे हैं हिटलर का उस खज़ाने के बारे में जिसके बारे में कहा जाता है कि वो आज भी मौजूद है। क्योंकि हिटलर की ट्रेन मिलने का दावा किया जा रहा है, हिटलर की गोल्डन ट्रेन द्वितीय विश्व युद्ध के सबसे बड़े राज़ में से एक है, जिस पर से अब तक पर्दा नहीं उठाया जा सका है।

एडोल्फ हिटलर दुनिया का इकलौता ऐसा तानाशाह था, जिसकी धमक की दुश्मनों को निस्तोनाबूद करने के लिए काफी थी। जिस तानाशाह के क्रूर इरादों से दुनिया थर्राती थी, उस तानाशाह की जिन्दगी का एक ही मकसद था, खजाना, उसका एक ही जुनून था विश्वविजेता बनकर पूरी दुनिया के खजाने पर कब्जा करना। हिटलर के पास बेहिसाब दौलत थी, तभी अचानक एक खबर से पूरी दुनिया हिल गई। हिटलर के खजाने से भरी ट्रेन एक दिन गायब हो गई थी। कहां गया हिटलर का खजाना, किसने हिम्मत की हिटलर के खजाने से भरी ट्रेन को लूटने का?

हिटलर की उस मिसिंग ट्रेन में खरबों के हीरे जवाहरात थे। ट्रेन के 24 डिब्बों में भरकर खरबों की संपत्ति को जर्मनी के लिए रवाना किया गया था। लेकिन वो ट्रेन जर्मनी पहुंची ही नहीं, हिटलर के उस खजाने को खोजने की बहुत कोशिश हुई, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला, ट्रेन कहां गई, किसने लूटा खजाना, ये भी रहस्य के पन्नों में दफन हो गया था। लेकिन अब हिटलर का वो खजाना मिल चुका है, हिटलर की वो अकूत दौलत अब सबके सामने आने वाली है, जल्द ही उस ट्रेन का राजफाश होने वाला है, क्योंकि हिटलर की द मिसिंग ट्रेन मिल चुकी है।

पौलैंड में अब उस जगह को ढूंढने का काम शुरू हो जाएगा। और इस अभियान में अगर द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान साल 1945 में गायब हुई वो गोल्डन ट्रेन मिल जाती है। तो यकीन मानिए ये दुनिया का सबसे बड़ा खजाना होगा।

इस सबसे बड़े खजाने की तलाश 75 सालों से पूरी दुनिया को थी। ये वही खजाना है जो यहूदियों के नरसंहार के बाद लूटा गया था, ये वही खजाना है, जिसे हिटलर ने यहूदियों के नरसंहार के बाद जर्मनी के लिए रवाना किया था, लेकिन हिटलर की ख्वाहिश अधूरी रह गई, क्योंकि जर्मनी के लिए खजाने से भरी जो ट्रेन निकली थी वो रास्ते में ही गायब हो गई।

अब पोलैंड की सरकार ने उस जगह की पहचान कर ली है, जहां नाजियो की ये ट्रेन गायब हुई थी। दावा किया जाता है वो सिर्फ एक ट्रेन नहीं थी, बल्कि नाजियों ने तीन ट्रेनों में भरकर गोल्डन ट्रेन को जर्मनी के लिए रवाना किया था। हिटलर की गोल्डन ट्रेन के बारे मे दावा किया जा रहा है कि उसमें सोने-जेवरात, हथियार, बेशकीमती कलाकृतियां रखी हुई थी, कहा तो यहां तक जा रहा है कि हिटलर की उसी गोल्डन ट्रेन में ही बेशकीमती अंबर रूम भी हो सकता है। अंबर रूम को दुनिया की खोई हुई सबसे बेशकीमती कलाकृति माना जाता है।

चेक बॉर्डर के पास 18 वर्ग मील क्षेत्र में विशेषज्ञ अगले हफ्ते से डिटेक्टर्स और अन्य उपकरणों के साथ ट्रेन तक पहुंचने के लिए काम शुरू करेंगे। ये क्षेत्र अब पोलिश शहर वरोक्ला के इलाके में आता है। आशंका ये भी जताई जा रही है कि ट्रेन के आसपास बारूदी सुरंगें बिछी हो सकती हैं। इसलिए सरकार सोच समझकर इस खुदाई को अंजाम देना चाहती है, द्वितीय विश्वयुद्ध के सबसे बड़े राज में हिटलर की गोल्डन ट्रेन को शामिल किया जाता है, और अब ये राज खुलने वाला है।