फारस की खाड़ी में जंगी जहाज भेजेगा भारत

नई दिल्ली(24 अप्रैल): भारत फारस की खाड़ी में जंगी जहाजों का बेड़ा भेजने जा रहा है। ऐसा करने के पीछे भारत का उद्देश्य इस क्षेत्र में स्थित देशों से अपने कूटनीतिक संबंधों में सैन्य महत्व जोड़कर अधिक प्रभाव बनाना बताया जा रहा है। भारत की कोशिश सुन्नी बहुल अरब देशों जैसे सऊदी अरब, यूएई और कुवैत के साथ साथ शिया बहुल देश ईरान के साथ रिश्तों में संतुलन बैठाकर चलना है। भारत के 5 वॉरशिप्स अगले महीने रवाना किए जाएंगे। ये डिफेंस रिलेशनशिप को मजबूत करने से जुड़े ऑपरेशंस में हिस्सा लेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई से 3 मई को गाइडेड मिसाइल से लैस आईएनएस दिल्ली, स्टील्थ आईएनएस तरकश और आईएनएस त्रिखंड को रवाना किया जाएगा। इसके अलावा आईएनएस गंगा और टैंकर आईएनएस दीपक की भी पर्शियन गल्फ में तैनाती होगी। तीन दिन दुबई में रहने के बाद 12 मई को ये बेड़ा कुवैत पहुंचेगा। इसके बाद ये बेड़ा मनामा (बहरीन) और मस्कट (ओमान) पहुंचेगा। वहीं 27-28 मई को ये बेड़ा मुंबई लौट आएगा। 20 से 23 मई तक एक अन्य वॉरशिप ईरान के सदर्न कोस्ट बंदर अब्बास पोर्ट सिटी भेजा जाएगा।

इतना ही नहीं, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर मई में ओमान दौरे पर रहेंगे। इसी दौरान, IAF सुखोई-30MKI फाइटर जेट और IL-78 मिड-एयर रीफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट अलास्का (यूएस) एयरबेस में रेड फ्लैग एक्सरसाइज से लौटते वक्त यूएई में रहेगा। अलास्का में ये एक्सरसाइज 28 अप्रैल से 13 मई तक होगी।

क्यों अहम है ईरान

ईरान भारत के लिए बेहद अहम है। इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर प्रोजेक्ट के जरिए अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक पहुंचने के लिए ईरान अहम रास्ता है। ईरान के चाबहार बंदरगाह से भारत को चीन का मुकाबला करने में मदद मिलेगी। चीन पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को विकसित कर रहा है।