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रेप के आरोप से बेदाग बरी हुए शख्स ने इच्छा मृत्यु की इजाज़त मांगी

नई दिल्ली (27 जुलाई): बलात्कार के झूठे आरोप में सात साल जेल में काट कर आये घाटकोपर के एक शख्स ने 200 करोड़ की क्षतिपूर्ति मांगी है। उसने कहा है कि यदि उसे क्षतिपूर्ति नहीं दी जासकती तो उसे इच्छा मृत्यु की इजाज़त दी जाये। 42 साल के गोपाल शेते एमबीए हैं। पुलिस की एक ज़रा सी भूल की वज़ह से उनका भरा-पूरा परिवार बिखर गया। उनकी बच्चियों को अनाथालय में रहना पड़ा था। ये गोवाल शेते की कहानीः

- गोपाल शेते को 29 जुलाई 2009 को पुलिस ने बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया

- गिरफ्तारी की वज़ह सिर्फ यह थी कि पीड़िता ने जो नाम और हुलिया बताया वो बलात्कारी से मिलता था

- घटना के समय गोपाल, तपेदिक से पीड़ित अपनी पत्नी के साथ थे, मगर पुलिस ने उनकी एक न सुनी

- लगभग छह साल तक उन्हें बेल नहीं दी गयी। अंत में मुंबई हाईकोर्ट के न्यायधीश अभय थिप्से ने आरोपी की पहचान पर शक जताते हुए जून 2015 में गोपाल को बरी कर दिया।  

- बरी होने के बाद गोपाल ने क्षतिपूर्ति की वाद दायर किया, जिस पर अभी तक सुनवाई नहीं हुई। इससे क्षुब्द्ध होकर उसने इच्छा मृत्यु की इजाज़त मांगी है।  


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