CBSE: 2018 से खत्म हो जाएगी ग्रेस मार्क्स देने की 'मॉडरेशन पॉलिसी'

नई दिल्ली ( 13 जून ): CBSE बोर्ड की मॉडरेशन पॉलिसी को लेकर काफी दिनों से चर्चा चल रही है। जिसकी वजह से CBSE के परिणाम में भी देरी हुई। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) 2018 तक स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़े सुधार की तैयारी में है। इसके तहत 'नंबर बढ़ाकर देने की कुप्रथा' को खत्म किया जाएगा और इसकी जगह 2018 से ज्यादा साइंटिफिक मॉडरेशन पॉलिसी लागू करेगा।

बता दें कि सीबीएसई बोर्ड में नंबर बढ़ाकर देने की परंपरा इस साल से ही खत्म होनी थी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट नेइस फैसले पर रोक लगा दिया। फैसले पर रोक का मुख्य कारण इसके समय को लेकर था। इसे साथ ही सभी बोर्डों के एकसमान पाठ्यक्रम और पेपर की दिशा में भी बढ़ा जाएगा।

इस गलत परंपरा को खत्म करने के लिए एचआरडी मिनिस्ट्री ने एक इंटर बोर्ड वर्किंग ग्रुप (आईबीडब्ल्यूजी) का गठन किया है। आईबीडब्ल्यूजी में आठ बोर्ड्स शामिल हैं, जो नंबर बढ़ाकर देने की परंपरा पर रोक लगाने के लिए विस्तार से योजना तैयार करेंगे। आईबीडब्ल्यूजी नियमित रूप से चर्चा करेगा और एक ऐसा मॉडल तैयार करेगा, जिस पर सभी बोर्ड्स को अमल करना होगा।

कुछ अहम विषयों का सभी बोर्ड्स का सामान्य पाठ्यक्रम भी होगा। ग्रेस मार्क्स पॉलिसी वेबसाइट्स पर अलोड की जाएगी और पाठ्येत्तर विषयों के लिए मार्क्स एवं ग्रेड्स अलग से देने होंगे। इसके अलावा असेसमेंट में समानता लाने के लिए सीबीएसई के साथ बोर्डों को प्रश्नपत्र साझा करने की भी योजना है।

इस सिलसिले में एचआरडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'योजना के मुताबिक इस साल मॉडरेशन पॉलिसी को खत्म नहीं किया जा सका। अगले साल तक इस योजना पर सभी बोर्ड्स अमल करें, हम इस दिशा में काम कर रहे हैं।'

 

उन्होंने कहा, 'वास्तव में सभी बोर्ड्स अगले साल से नंबर बढ़ाकर देने की परंपरा को खत्म करने के लिए तैयार हो गए हैं। कुछ बोर्ड्स ने इस साल से इस नियम को लागू करने को लेकर 24 अप्रैल, 2017 को हुई मीटिंग में कुछ समस्याएं गिनाई थीं लेकिन 2018 से इसे लागू करने के लिए सभी तैयार हैं।'