''हरियाणा का पानी रोका तो दिल्ली का पानी रोक देंगे''

नई दिल्‍ली (17 मार्च): सतलुज-यमुना नहर लिंक पर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। आईएनएलडी ने चेतावनी दी है कि अगर पंजाब ने हरियाणा का पानी रोका तो फिर वो दिल्ली का पानी रोक देंगे। विपक्ष जहां आर-पार की लड़ाई के मूड में है तो वहीं हरियाणा के सीएम खट्टर के सुर नरम हैं। खट्टर को भरोसा है कि हरियाणा का हक नहीं मारा जाएगा।

इससे पहले आज आईएनएलडी विधायकों ने अभय चौटाला की अगुवाई में पंजाब विधानसभा गेट के बाहर हंगामा किया। आईएनएलडी ने एसवाईएल बिल को वापस लेने की मांग की है। आईएनएलडी का कहना है कि पंजाब सरकार के फैसले से हरियाणा के हितों को नुकसान पहुंचेगा।

केवल इंडियन नेशनल लोकदल ही नहीं बल्कि कांग्रेस भी इस मुद्दे पर तीखे तेवर अपनाए हुए हैं। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने भी कहा है कि कांग्रेस हरियाणा के हितों की अनदेखी नहीं होने देगी। हुड्डा ने कहा है कि सतलुज के पानी को लेकर पंजाब सरकार के फैसले के ख़िलाफ़ वो राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे।

क्‍या है मामला: सतलुज-यमुना लिंक नहर का संकट सालों पुराना है। पंजाब में जो भी सरकार सत्ता में आई, उसने इसको लेकर सिर्फ सियासत की लेकिन मसले का हल नहीं निकल पाया। पंजाब और हरियाणा में सरकारें बदलती गई लेकिन सतलुज यमुना लिंक नहर का संकट जस का तस बना रहा। आज भी इस पानी पर हर कोई अपना हक जताकर सियासत कर रहा है। अब पंजाब सरकार के इसकी जमीन को किसानों को वापस करने के प्रस्ताव लाने के बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। हालांकि इंदिरा गांधी सरकार से लेकर अब तक सतलुज-यमुना लिंक नहर को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच तकरार जारी है।

दरअसल एसवाईएल नहर के जरिए हरियाणा को अपने हिस्से का 3.83 मिलियन एकड़ फुट पानी मिलना है। सुप्रीम कोर्ट ने 2004 में फैसला दिया था कि एक साल के भीतर पंजाब सरकार इस नहर का निर्माण कराए। अगर पंजाब सरकार नहर नहीं बनाती तो केंद्र अपने खर्च पर ये नहर बनाए। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद भी इस मसले का कोई हल नहीं निकला। अब पंजाब सरकार ने इस सुलझाने के लिए किसानों को जमीन वापस करने का कदम उठाया है। हालांकि इसको लेकर पंजाब और हरियाणा के किसानों की मिली-जुली राय है।

इस सबके बीच गौर करने वाली बात ये है कि जिस सतलुज-यमुना लिंक नहर को लेकर ये पूरा विवाद है, वो बेहद खस्ताहाल है। हालांकि अब पंजाब सरकार ने जो दांव खेला है। उससे उम्मीद है कि इस मसले का कोई न कोई हल जरूर निकल पाएगा और अगर ऐसा हुआ तो नहर की जमीन पंजाब के किसानों को मिलेगी और वो उस पर खेती कर सकेंगे, लेकिन ऐसा करना बादल सरकार के लिए आसान नहीं होगा क्योंकि हरियाणा सरकार सतलुज-यमुना लिंक नहर के जरिए प्रदेश में पानी लाने के अपने मकसद को इतनी आसान से नहीं छोड़ने वाली।