जब नेहरू ने माउंटबेटन को सौंप दिया था मंत्री के नामों की जगह खाली लिफाफा

नई दिल्ली (9 अगस्त): देश को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली, लेकिन यह पहले से ही तय था कि प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू बनेंगे और उप प्रधानमंत्री सरदार बल्लब भाई पटेल। पंडित नेहरू ने अपनी पहली मंत्रिपरिषद के नाम का लिफाफा लॉर्ड माउंटबेटन को सौंप दिया, लेकिन वह खाली था।

दरअसल, माउंटबेटन को इस लिफाफे में जो नाम दिए जाने थे, पंडित नेहरू ने उसकी जगह दूसरा लिफाफा उन्हें पकड़ा दिया था। हालांकि बाद में मंत्री के नामों का खत माउंटबेटन को दोबारा भेजा गया। इनमें 13 नाम थे, जिन्होंने नेहरू कैबिनेट में मंत्री पद की शपथ ली। जो 13 लोग इस कैबिनेट में चुने गए, उनमें जाति, धर्म और लिंग का ही नहीं बल्कि सभी विचारधारों का ध्यान रखा गया।

हालांकि भीम राव अंबेडकर को नेहरू मंत्रिमंडल में गांधी जी के कारण जगह मिली। जब नेहरू और बल्लब भाई पटेल मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले लोगों के नाम का पत्र लेकर गांधी जी के पास पहुंचे तो उसमें से अंबेडकर का नाम गायब था, गांधीजी ने पूछा कि इसमे अंबेडकर का नाम क्यों नहीं है, पटेल-नेहरू चुप थे और इससे पहले वह कुछ कहते गांधीजी ने उन्हें आदेश दे दिया कि इसमे अंबेडकर के नाम को शामिल किया जाए।

ये थे नेहरू की कैबिनेट के 13 चेहरे...
- डॉ. भीम राव अंबेडकर।
- श्यामा प्रसाद मुखर्जी।
- बल्लब भाई पटेल
- आरके शंखमुख्म चेट्टी
- बलदेव सिंह
- जॉन मथई
- मौलाना अबुल कलाम आजाद
- राजेंद्र प्रसाद
- जगजीवन राम
- सीएच भाभा
- रफी अहमद किदवई
- राजकुमारी अमृत कौर
- नहरन विष्‍णु गाडगिल