इस कारण गांधीजी ने नहीं मनाया था आजादी का जश्न

नई दिल्ली (10 अगस्त): देश 15 अगस्त को आजादी की 70वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे है। लेकिन बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि आजादी के मुखिया महात्मा गांधी ने इसका जश्न नहीं मनाया। लोग उनसे पूछते रहे कि वह आजादी का जश्न क्यों नहीं मना रहे, लेकिन उन्होंने इस मामले में चुप्पी साधे रखी।

हालांकि जानकारों का मानना है कि गांधी जी इस बात से जरूर खुश थे कि अंग्रेज भारत छोड़कर जा रहे हैं, लेकिल उनकी इस खुशी को उस दुख ने खत्म कर दिया था, जिसमें भारत को दो देशों में बांट दिया गया। बंटवारे के बाद एक करोड़ से ज्यादा लोग पाकिस्तान से हिंदुस्तान या हिंदुस्तान से पाकिस्तान जा रहे थे।

धर्म के नाम पर बंटवारा देखने और दिल्ली में बैठकर मंत्रियों का चेहरा देखने में महात्मा गांधी की कोई दिलचस्पी नहीं थी। महात्मा गांधी की टोपी पहनने वाले दिल्ली की सत्ता पर काबिज थे, लेकिन 78 साल के गांधी अकेले अपने दम पर पश्चिम बंगाल में धर्म के नाम पर होने वाले दंगों की तपिश झेल रहे थे।

14 अगस्त 1947 को जब पश्चिम बंगाल के सीएम गांधी से मिलने पहुंचे तो उन्होंने पूछा कि आप आजादी का जश्न कैसे मनाएंगे, लेकिन गांधी चुप रहे। तमाम लोग और दूसरे नेता गांधी से पूछते रहे कि आजादी का जश्न केसे मनाया जाएगा, लेकिन उनकी चुप्पी नहीं टूटी। जब एक ब्रिटिश पत्रकार गांधी जी का इंटरव्यू लेने पहुंचा तो उन्होंने इतना कहा कि दुनिया से कह तो कि गांधी अंग्रेजी भूल गया।